ब्रेकिंग
मध्य प्रदेश के 75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार, TET समकक्ष मान्यता हेत... भोपाल: बारिश से मिट्टी बहने पर नाले तक पहुँचा नवजात का शव, खजूरी सड़क पुलिस ने किया खुलासा रतलाम के सिंदुरकिया हत्याकांड का सनसनीखेज पर्दाफाश: 6 महीने पुरानी रंजिश में दोस्त ने चाकू से किए 14... ग्वालियर में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ा विवाद! कार टकराने के बाद दो पक्षों में चले लाठी-सरिए, एक दर... आवारा कुत्तों और डॉग बाइट पर MP हाईकोर्ट सख्त: सरकार ने पेश की स्टेटस रिपोर्ट, 14 अगस्त को अगली सुनव... 12 अगस्त को सूर्यग्रहण पर छाया संशय! ज्योतिष आचार्य ने बताया— क्या हरियाली अमावस्या की पूजा-पाठ पर ल... छिंदवाड़ा से CM मोहन यादव करेंगे 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान 2026' का आगाज़, जनवरी 2027 तक लगेंगे... मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: FSL की 20% DNA रिपोर्ट्स की होगी रैंडम जांच, कट-पेस्ट की सफाई... भारतीय वायु सेना में स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने रचा नया इतिहास, FCL कोर्स पूरा करने वाली पहली महिल... हरिद्वार बनाम देवघर कांवड़ यात्रा: क्यों होती है दोनों की तुलना? समझें सामाजिक, भौगोलिक और प्रशासनिक...
मध्यप्रदेश

Bargi Dam Cruise Accident: बरगी क्रूज हादसे में नया मोड़; प्रत्यक्षदर्शी ने लगाए गंभीर आरोप, एम्बुलेंस में नहीं था मेडिकल स्टाफ

जबलपुर के बहुचर्चित बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। हादसे के दौरान मौके पर मौजूद रहे और बचाव कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने जांच आयोग के समक्ष कई गंभीर खुलासे किए हैं। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हुए साक्ष्य के तौर पर वीडियो और पेन ड्राइव आयोग को सौंपी है।

🚑 ‘108 एम्बुलेंस में नहीं था कोई मेडिकल स्टाफ’

नीरज मिश्रा ने अपने दावों में बताया कि दुर्घटना के तुरंत बाद जब 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, तो उसमें चालक के अलावा कोई भी प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण घायलों को मौके पर प्राथमिक उपचार (First Aid) नहीं मिल सका, जो उनकी जान बचाने के लिए बेहद जरूरी था। इस संबंध में उन्होंने 14 बिंदुओं पर आधारित एक विस्तृत शिकायत न्यायिक जांच आयोग को दी है।

📂 जांच आयोग के पास पहुंचे पुख्ता साक्ष्य

नीरज मिश्रा द्वारा सौंपी गई शिकायत में हादसे के बाद की स्थितियों का विस्तार से विवरण है। आयोग अब इन साक्ष्यों का परीक्षण करेगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि बचाव कार्यों के दौरान प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। प्रत्यक्षदर्शी के इस बयान ने अब स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

संपादकीय टिप्पणी: बचाव कार्यों में बुनियादी मेडिकल सुविधाओं का अभाव किसी भी बड़े हादसे में मौतों का आंकड़ा बढ़ा सकता है। क्या प्रशासन को ऐसी आपदाओं के लिए विशेष ‘डिजास्टर रिस्पांस प्रोटोकॉल’ को और अधिक सख्त नहीं करना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।

Related Articles

Back to top button