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मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश के 75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार, TET समकक्ष मान्यता हेतु दाखिल की पूरक अर्जी

भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में वर्ष 2005 से 2009 के मध्य पदस्थ हुए लगभग 75 हजार शिक्षकों के प्रमोशन की राह सुगम करने के ध्येय से राज्य सरकार ने देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख किया है।

स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में एक पूरक अर्जी (Supplementary Application) दाखिल कर नम्र गुहार लगाई है कि वर्ष 2005 और 2008 में आयोजित संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-2 पात्रता परीक्षा को ही वर्तमान ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (TET) के समकक्ष मान्यता प्रदान की जाए। विभाग का सशक्त तर्क है कि उस अवधि में आयोजित परीक्षा का प्रारूप एवं स्तर वर्तमान टीईटी के सर्वथा समान ही था, अतः विगत डेढ़-दो दशकों से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे इन अनुभवी शिक्षकों को पुनः टीईटी परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए बाध्य न किया जाए। सरकार ने रेखांकित किया कि देश में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम अप्रैल 2010 में प्रभावी हुआ था, जबकि मध्य प्रदेश में शिक्षकों के चयन हेतु पात्रता परीक्षा प्रणाली वर्ष 2005 से ही अस्तित्व में है। यदि शीर्ष अदालत से सकारात्मक राहत प्राप्त होती है, तो वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त हुए इन हजारों शिक्षकों की पदोन्नति का मार्ग पूर्णतः प्रशस्त हो जाएगा।

⚖️ अगस्त 2028 तक TET पास करना अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बीच दायर हुई याचिका

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में अध्यापन कार्य हेतु टीईटी उत्तीर्ण होना विधिक रूप से अनिवार्य है।

शीर्ष अदालत ने सख्त हिदायत दी है कि अगस्त 2028 तक जो शिक्षक टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करेंगे, उन्हें सेवा से पृथक किया जा सकता है। इसी कानूनी बाध्यता से शिक्षकों को राहत दिलाने हेतु राज्य सरकार ने पूरक याचिका का सहारा लिया है।

💡 क्या होती है पूरक याचिका (Supplementary Application)?

अदालत में पूर्व से लंबित किसी प्रकरण के अंतर्गत दायर की जाने वाली अतिरिक्त अर्जी को पूरक याचिका कहते हैं। इसका उपयोग मुख्य केस की सुनवाई के दौरान समय-सीमा में विस्तार, नए साक्ष्य प्रस्तुत करने अथवा पूर्व में निर्गत निर्देशों में आंशिक संशोधन की मांग हेतु किया जाता है। यह कोई पृथक नया मुकदमा न होकर मुख्य मामले का ही एक अंग होती है।

🔄 प्राथमिक शिक्षकों के लिए म्यूचुअल ट्रांसफर नीति जारी, अब आपसी सहमति से बदल सकेंगे स्कूल व जिला

दूसरी ओर, चालू शैक्षणिक वर्ष में नियुक्त हुए लगभग 7,500 प्राथमिक शिक्षकों को प्रदेश सरकार ने स्थानांतरण का सुनहरा अवसर प्रदान किया है।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नवीन दिशानिर्देशों के अनुसार, नवनियुक्त शिक्षक आपसी रजामंदी (Mutual Transfer) के आधार पर अपना पदस्थापना स्थल और जिला बदल सकते हैं।

📋 म्यूचुअल ट्रांसफर की मुख्य शर्तें एवं ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पारस्परिक स्थानांतरण हेतु निम्नलिखित पारदर्शी शर्तें तय की गई हैं:

  • ग्रामीण व शहरी विनिमय: यदि ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थ शिक्षक शहरी क्षेत्र में जाना चाहता है, तो संबंधित शहरी क्षेत्र के शिक्षक को उसी ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल में पदभार ग्रहण करना होगा।

  • पति-पत्नी का एक ही जिले में पदस्थापन: पृथक-पृथक जिलों में कार्यरत दंपत्ति पद रिक्त होने की स्थिति में एक ही जिले में स्थानांतरण प्राप्त कर सकेंगे।

  • वर्गवार समानता: ट्रांसफर केवल समान वर्ग (सामान्य से सामान्य, अनुसूचित जाति से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से अनुसूचित जनजाति) के मध्य ही संभव होगा।

  • आवेदन तिथि व प्रक्रिया: जिला बदलाव हेतु पोर्टल पर 10 और 11 अगस्त को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा, जिसमें दोनों परस्पर ट्रांसफर चाहने वाले शिक्षकों का हस्ताक्षरित सहमति-पत्र (Consent Letter) अपलोड करना आवश्यक होगा।

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