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उत्तरप्रदेश

अखिलेश ने चार सीटों को रखा होल्ड, कांग्रेस का साथ या मुस्लिम परस्त छवि से बचने का दांव?

उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान नहीं हुआ, लेकिन राजनीतिक बिसात बिछाई जाने लगी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को 10 सीटो में से 6 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. पश्चिमी यूपी की चार सीटों पर सपा ने अभी भी पत्ते नहीं खोले हैं. ऐसे में सवाल ये उठता है कि अखिलेश यादव ने यूपी में कांग्रेस से दोस्ती बरकरार रखने के लिए चार सीटों पर टिकट होल्ड किए हैं या फिर मुस्लिम परस्त छवि से बचने का दांव है?

2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी के 9 विधायकों के सांसद चुने जाने से 9 सीटें खाली हुई हैं तो सीसामऊ सीट सपा के इरफान सोलंकी के सजा होने के चलते खाली हुई है. इस तरह से यूपी की मिल्कीपुर, कटेहरी, सीसामऊ, कुंदरकी, गाजियाबाद, फूलपुर, मझवा, सीसामऊ, खैर और मीरापुर सीट पर उपचुनाव है. 2022 के विधानसभा चुनाव में पांच सीटें सपा, तीन सीटें बीजेपी और उसके सहयोगी दल निषाद पार्टी और आरएलडी के एक-एक विधायक चुने गए थे.

सपा ने घोषित किए छह सीट पर कैंडिडेट

सपा ने अयोध्या की मिल्कीपुर सीट से सपा सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को प्रत्याशी बनाया है. अंबेडकरनगर की कटहरी सीट पर सांसद लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा को टिकट दिया. प्रयागराज की फूलपुर सीट से पूर्व विधायक मुस्तफा सिद्दीकी को कैंडिडेट बनाया है. मिर्जापुर की मझवां सीट पर पूर्व सांसद रमेश चंद बिंद की बेटी डॉ. ज्योति बिंद को टिकट दिया है तो कानपुर की सीसामऊ सीट से पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को सपा ने प्रत्याशी बनाया है.

वेस्ट यूपी की 4 सीट पर टिकट रखा होल्ड

अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर की मीरापुर, मुरादाबाद की कुंदरकी, अलीगढ़ की खैर और गाजियाबाद सदर पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं किया है. यह चारों सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हैं. मीरापुर विधानसभा सीट से आरएलडी के विधायक रहे चंदन चौहान बिजनौर से सांसद बन चुके हैं. गाजियाबाद सदर से बीजेपी विधायक रहे अतुल गर्ग सांसद बन चुके हैं. कुंदरकी से सपा के विधायक रहे जियाउर्रहमान बर्क संभल से सांसद बने गए. खैर सीट से बीजेपी के विधायक रहे अनूप प्रधान वाल्मीकी हाथरस से सांसद बने हैं.

उपचुनाव में पांच सीटों की डिमांड

लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन कर किस्मत आजमाने वाली कांग्रेस उपचुनाव में पांच सीटों की डिमांड कर रही थी. अखिलेश यादव ने कांग्रेस को विश्वास में लिए बगैर बुधवार को छह सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है. इसमें मझवां और फूलपुर सीटें भी शामिल है, जिस पर कांग्रेस उपचुनाव लड़ने के लिए मांग रही थी. हालांकि, पश्चिमी यूपी की चार सीटों पर सपा ने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं किया. ऐसे में सपा ने क्या ये सीटें कांग्रेस की दोस्ती बरकरार रखने के लिए छोड़ी है या फिर कोई और ही दांव है.

कांग्रेस से दोस्ती के लिए छोड़ीं चार सीटें?

यूपी उपचुनाव में कांग्रेस ने सपा से पांच सीटों की डिमांड रखी है, जिनमें मझवां, मीरापुर, फूलपुर, खैर और गाजियाबाद सीट है. यह पांच सीटें वो हैं, जहां बीजेपी और उसके सहयोगी दल के विधायक थे. कांग्रेस के दावे वाली मझवां और फूलपुर सीट पर सपा ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. ऐसे में कांग्रेस के यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय ने कहा कि सूची जारी करने से पहले सपा नेतृत्व ने उन्हें कोई जानकारी नहीं दी. इस बारे में इंडिया गठबंधन की समन्वय समिति में भी कोई चर्चा नहीं की गई.

सिर्फ एक सीट दे सकती है सपा

हालांकि, सूबे की बाकी बची चार विधानसभा सीटों के बारे में पूछे जाने पर अविनाश पांडेय ने कहा कि राजनीति में संभावनाएं सदैव बरकरार रहती हैं. कांग्रेस को ये उम्मीद है कि यूपी की बची चार सीटों में से उसे सीटें मिल सकती है. कुंदरकी और मीरापुर सीट सपा किसी भी सूरत में कांग्रेस को नहीं देगी. इसके पीछे वजह यह है कि कुंदरकी सपा सेटिंग सीट है और मीरापुर सीट 2022 में आरएलडी के लिए छोड़ दी थी. इस तरह खैर और गाजियाबाद सीट बच रही हैं.सपा इन दो में कांग्रेस को सिर्फ एक सीट गाजियाबाद दे सकती है.

सपा कांग्रेस को दे सकती है यह तर्क

मध्य प्रदेश और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के आश्वासन के बावजूद सपा को इंडिया गठबंधन के तहत कोई सीट नहीं मिली थी. इसलिए सपा यूपी में कांग्रेस के दावे को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. कांग्रेस की मध्य प्रदेश और हरियाणा की राज्य इकाइयों ने कहा था कि उनके यहां सपा का कोई जनाधार नहीं है. अब इसी तर्क के आधार पर सपा का कहना है कि यूपी में कांग्रेस का भी कोई आधार नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि चार सीटों पर भी गठबंधन के तहत कांग्रेस के हाथ मुश्किल से ही कुछ लग पाएगा.

मुस्लिम परस्त छवि से बचने का दांव

यूपी की जिन चार सीटों पर सपा ने टिकट होल्ड कर रखा है, उसके पीछे कांग्रेस से दोस्ती को बरकरार रखने की नहीं बल्कि अखिलेश की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. सपा ने बुधवार को छह सीटों पर टिकट का ऐलान किया है, उसमें दो मुस्लिमों को उम्मीदवार बनाया गया है. फूलपुर से मुस्तफा सिद्दीकी और सीसामऊ से नसीम सोलंकी को टिकट दिया है. इसके अलावा कुंदरकी और मीरापुर सीट से भी सपा के मुस्लिम उम्मीदवार के चुनाव लड़ने की संभावना है. अगर सपा यूपी के सभी 10 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करती तो उसमें चार मुस्लिम चेहरे शामिल होने पर विपक्ष खासकर बीजेपी को घेरने का मौका मिल जाता.

इस वजह से की चार सीटें होल्ड

अखिलेश यादव नहीं चाहते हैं कि सपा की मुस्लिम परस्त छवि बन सके. मुलायम सिंह यादव के दौर में सपा की बनी मुस्लिम परस्त छवि को लेकर बीजेपी घेरती रही है. इसका खामियाजा भी सपा को उठाना पड़ा है. इसीलिए अखिलेश यादव ने सपा को मुस्लिम-यादव की पार्टी से बाहर निकालने के लिए पीडीए का फॉर्मूला दिया है. मुस्लिमों की जगह अल्पसंख्यक शब्द का प्रयोग अखिलेश यादव करते हैं ताकि बीजेपी को घेरने का मौका न मिले. इसी रणनीति के तहत अखिलेश यादव ने एक साथ 10 सीटों पर उम्मीदवार के नाम का ऐलान करने के बजाय पहली सूची में छह नाम का ऐलान किया है और चार सीट पर टिकट होल्ड रखे हैं.

घर वापसी करने वाले हाजी रिजवान

कुंदरकी विधानसभा सीट से सपा से पूर्व विधायक हाजी रिजवान के चुनाव लड़ने की संभावना है. इसी भरोसे पर बसपा छोड़कर सपा में घर वापसी की है और अब वो उपचुनाव लड़ने के लिए बैटिंग कर रहे हैं. इसी तरह मीरापुर सीट पर सपा के टिकट पर कादिर राणा के चुनाव लड़ने की संभावना है. 2022 में बसपा छोड़कर सपा में आए थे और 2024 में बिजनौर लोकसभा सीट से टिकट मांग रहे थे. सपा ने उन्हें लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ाया था, लेकिन अब उपचुनाव में उतारने की तैयारी में है.

यह है सपा की असली रणनीति

सपा ने मीरापुर से कादिर राणा और कुंदरकी से हाजी रिजवान दोनों को चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे रखी है. ऐसे में इन दोनों सीटों पर भी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान होता तो फिर दस में 4 सीट पर मुस्लिम कैंडिडेट होने का मतलब 40 फीसदी मुस्लिम प्रत्याशी होते. इसे लेकर सपा को घेरने का मौका बीजेपी के हाथ लग जाता. यही वजह है कि सपा ने बहुत स्ट्रेटेजी के तहत 6 सीट पर कैंडिडेट उतारे हैं ताकि मुस्लिम परस्त की छवि से बचा जा सके. इस तरह कांग्रेस के साथ दोस्ती नहीं बल्कि सपा की छवि को बचाए रखने की रणनीति है.

2027 विधानसभा का सेमीफाइनल

उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर उपचुनाव को 2027 विधानसभा का सेमीफाइनल माना जा रहा है. ऐसे में सपा और बीजेपी के बीच सीधे मुकाबले की बात कही जा रही है, जिसके लिए दोनों ही दलों ने पूरी ताकत लगा रखी है. ऐसे में बसपा से लेकर कांग्रेस भी पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ने के मूड में है. बीजेपी के दो सहयोगी भी आरएलडी और निषाद पार्टी उपचुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं. आरएलडी मीरापुर सीट पर किस्मत आजमाने के साथ खैर सीट भी मांग रही है तो निषाद पार्टी मझवां सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है. लोकसभा चुनाव वाले प्रदर्शन को सपा उपचुनाव में बनाए रखने चाहती है ताकि 2027 के चुनाव में उसका माहौल बना रहे. ऐसे ही बीजेपी 2024 की चोट से उभरने के लिए उपचुनाव को हरहाल में जीतना चाहती है. इसीलिए शह-मात का खेल शुरू हो गया है.

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