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मध्यप्रदेश

खास है लालटिपारा गौशाला, खास है यहां के 10 टन गोबर से बने 11 फीट के गोवर्धन महाराज

ग्वालियर। जगत के पालनहार श्रीविष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार में पर्वताधिराज गोवर्धन पूजा के रूप में प्रकृति के संरक्षण और संबर्द्धन का संदेश दिया। द्वापर युग से ही सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा की परंपरा पवित्र कार्तिक मास की प्रतिपदा के दिन पूर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आनंदपूर्वक की जाती है।

हालांकि इस वर्ष अमावस्या पर श्रीलक्ष्मी पूजन के दूसरे दिन होकर तीसरे दिन उदया तिथि के अनुसार दो अक्टूबर शनिवार को मनाया जा रहा है। इस दिन गांव के गोवर से घर के आंगन, ग्रामीण क्षेत्रों में गांव की चौपाल व मंदिरों में गोवर्धन की आकृति बनाकर दोपहर के समय पूजन किया जाता है। शहर की ही नहीं प्रदेश की लाल टिपारा स्थित आदर्श गौशाला में पिछले आठ वर्ष से सामूहिक गोवर्धन पूजन कर गौ-वंश के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया जाता है। इस वर्ष शनिवार को आदर्श गौशाला में मुख्यमंत्री डा मोहन यादव गौवर्धन पूजा में भागीदारी करेंगे।

गौशाला प्रमुख संत स्वामी ऋषभदेवानंद महाराज ने बताया कि आदर्श गौशाला में गोवर्धन महाराज का पूजन पूर्ण श्रद्धाभाव के साथ की जायेगा। 108 टन के गोबर पर्वत पर 11 फीट ऊंची भगवान गोवर्धन की आकृति प्रतिष्ठा की जायेगी। भगवान गोवर्धन की अस्थाई प्रतिमा का निर्माण मुरैना में कराया गया है। इस प्रतिमा में भगवान योगेश्वरनीली कमली धारण कर कनिष्ठा पर गोवर्धन पर्वत धारण किये हैं। सिर पर मोर मुकुट धारण किये हुए हैं। गले में वनमालाएं व अाभूषण है।आसपास लता-पताएं हैं।अभी गाय के गोवर का पर्वत तैयार हैं। इस पर प्रतिमा की स्थापना शनिवार की सुबह की जायेगी। इसके साथ ही गौशाला में गौ-उत्पादों से संबंधित प्रदर्शनी लगाई जायेगी। इसके साथ ही गौसेवा के लिए उपयोग में आने वाले अत्याधुनिक उपकरणों को भी प्रदर्शित किया जायेगा।इ सके साथ ही गोवर्धन पूजा के लिए बड़ी संख्या में नगर के श्रद्धालु आते हैं।

  • गौशाला प्रमुख ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने की आलोकिक परंपरा गोवर्धन पूजन के साथ शुरु हुई। भगवान श्रीकृष्ण सात दिन अपनी कनिष्ठा पर परम पुण्यशाली गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा धारण करे ब्रजवासियों की देवों के राजा इंद्र के प्रकोप से रक्षा की।
  • इंद्र का प्रकोप शांत होने पर बृजवासियों के मन में भाव उत्पन्न हुआ कि छोटो सो नंद का लाला एक दिन में आठ बार भोग ग्रहण करता है। सात दिन से बाने कछु खाओ-पिओ न हैं। इसी भाव के सा ब्रजवासी अपने घरों से लाला के भोग के लिए सात दिन के अनुसार छप्पन भोग एक ही दिन में बनाकर लाये।
  • इसी परंपरा के तहत शनिवार को क्षेत्र के लोग अपने-अपने घरों से गोवर्धन महाराज के लिए अलग-अलग व्यंजन बनाकर लाएंगें। उसी का भोग गोवर्धन महाराज को अर्पित किया जाएंगें। इसके साथ ही गौशाला में अन्नकूट का भी आयोजन होगा।
  • दोपहर -डेढ़ बजे होगा गोवर्धन महाराज का पूजन किया जायेगा। पूजन के साथ ही दिनभर गौ-पूजन का सिलसिला शाम तक चलता रहेगा। गोवर्धन पूजन की तैयारियां गौशाला में की जा रहीं हैं।
  • आदर्श गौशाला नगर निगम की सबसे बड़ी गौशाला है। यह गौशाला मुरार स्थित लाल टिपारा पर है।
  • श्रीकृष्णायन संतों ने इसे गौधाम के रूप में विकसित किया है।
  • वर्तमान में 10 हजार से अधिक निराश्रित गौवंश को आश्रय के साथ सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • यह गौशाला लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई।
  • गौवंश के भोजन-पानी से लेकर बेहतर इलाज की भी व्यवस्था है।

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