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उत्तरप्रदेश

100 सालों से कुंभ में शामिल हो रहे, 122 साल से नहीं खाया भरपेट खाना, कौन हैं 128 साल के स्वामी शिवानंद बाबा?

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के संगम पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. महाकुंभ में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु और साधु-संत जुटे हुए हैं. इन्हीं में एक बाबा वो हैं जो बीते 100 सालों से हर कुंभ में भाग ले रहे हैं. इनका नाम स्वामी शिवानंद बाबा है और ये 128 साल पूरे कर चुके हैं. इस बार शिवानंद बाबा अपने शिष्यों के साथ महाकुंभ में पहुंचे हैं. वे यहां 40 दिन तक साधना करेंगे. शिवानंद बाबा को राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरूस्कार मिला है. वह एक योग चिकित्सक भी हैं. उनका जीवन बेहद संघर्ष भरा रहा हैं.

महाकुंभ मेला में सेक्टर 16 के संगम लोअर रोड पर बाबा शिवानंद का शिविर लगा है. जिसके बाहर बैनर लगा है, जिसमें उनका आधार कार्ड दिखाया गया है. उनके शिष्य के अनुसार, बाबा पिछले 100 वर्षों से प्रयागराज, नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में हर कुंभ मेले में भाग लेते रहे हैं. बाबा का जन्म 8 अगस्त 1896 को अविभाजित बंगाल के श्रीहट्ट जिले के गांव हरिपुर (वर्तमान में बांग्लादेश) में एक गोस्वामी ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जो बेहद गरीब थे.

भूख से हुआ माता-पिता का निधन, एक ही चिता पर किया था अंतिम संस्कार

उनके शिष्य ने बताया कि बाबा का परिवार बेहद गरीब था. उनके घर खाने को कुछ भी नहीं होता था. बचपन में बाबा के माता-पिता उन्हें गांव में आने वाले संतों को दे दिया करते थे, जिससे उनका पेट भर जाता था. जब वह चार साल के हुए तो परिजनों ने उन्हें संत ओंकारानंद गोस्वामी को सौंप दिया. जब वह 6 साल के हुए तो भूख के कारण उनकी बहन की मौत हो गई. जब वह घर पहुंचे तो एक सप्ताह बाद उनके माता-पिता की भी भूख के कारण निधन हो गया. दोनों को एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया. इस घटना से बाबा पर गहरा असर हुआ. तब से बाबा ने कभी भरपेट खाना नहीं खाया.

बिना नमक तेल का उबला खाना, नहीं लिया दान

बाबा शिवानंद योग करते हैं. वर्तमान में वे वाराणसी के दुर्गाकुंड के कबीर नगर में रहते हैं. महाकुंभ में शामिल होने के लिए वह संगम नगरी पहुंचे हैं. उनके शिष्य ने बाबा की दिनचर्या के बारे में बताया की वे प्रतिदिन आधा पेट खाना खाते हैं. रात 9 बजे सोते हैं. वहीं, तड़के तीन बजे उठ जाते हैं और योग शुरू कर देते हैं. उनके एक शिष्य ने मीडिया को बताया की बाबा चमत्कारी हैं. शिष्य ने बताया कि बाबा शिवानंद ने कभी किसी से दान नहीं लिया. वे बिना नमक और तेल का उबला हुआ भोजन करते हैं. वे हमेशा रोगमुक्त रहते हैं.

जब भक्त हो गया था हैरान

उन्होंने बताया कि एक रोज बाबा का एक भक्त उनसे मिलने पहुंचा. वो बहुत भूखा था. बाबा ने उसे मिट्टी के बर्तन में खीर दी. भक्त को वो खीर कम लगी और इसकी शिकायत की. जब उसने खीर खाना शुरू किया तो उसका पेट भर गया, लेकिन खीर खत्म नहीं हुई. इसके बाद वह बाबा के चरणों में गिर गया. स्वामी शिवानंद बाबा को 21 मार्च 2022 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने बाबा शिवानंद को पद्मश्री से अलंकृत किया.

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