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सिंधु नदी समझौताः भारत के किस रूख को वर्ल्ड बैंक के एक्सपर्ट ने सही माना?

भारत औऱ पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर विवाद दशकों पुराना है. इसे लेकर एक समझौता भी है मगर उस पर भी कुछ न कुछ मतभेद जाहिर होते रहते हैं. अब विश्व बैंक की ओर से नियुक्त एक न्यूट्रल एक्सपर्ट (यानी ऐसा विशेषज्ञ जो भारत-पाकिस्तान दोनों में से किसी की भी हिमायत न करने वाला हो) की इस विवाद पर प्रतिक्रिया आई है. जिसने किशनगंगा और रैटल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद को सुलझाने के तरीके को लेकर भारत के रूख को सही माना है.

इस विषय के केंद्र में एक दूसरा सिरा भी है. वह ये की भारत सिंधु जल संधि के तहत न्यूट्रल एक्सपर्ट की तरफ से सुझाए गए समाधान के लिए दबाव डालता रहा है. वहीं, पाकिस्तान उन्हें हल करने के लिए हेग में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का समर्थन करता है. पर मंगलवार को जब न्यूट्रल एक्सपर्ट ने भारत के रूख के हिसाब से विवाद सुलझाने की तरफ कदम बढ़ाया तो नई दिल्ली ने इस फैसले का स्वागत किया. भारत के विदेश मंत्रालय ने इसके पीछे कुछ खास वजहें भी गिनवाई.

भारत का रूख क्या है?

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि, भारत का ये लगातार और सैद्धांतिक रुख रहा है कि सिंधु नदी समझौते के तहत केवल न्यूट्रल एक्सपर्ट के पास ही इन मतभेदों पर फैसला लेने की ताकत है. लिहाजा, अब भारत समझौते की पवित्रता, अखंडता बनाए रखने के लिए न्यूट्रल एक्सपर्ट प्रक्रिया में भाग लेना जारी रखेगा ताकि मतभेदों को समझौते के प्रावधानों के हिसाब से सुलझाया जा सके. साथ ही, भारत ने साफ किया है कि वह अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायालय को मान्यता नहीं देता और उसमें भाग नहीं लेता.

क्यों है ये पूरा विवाद?

भारत और पाकिस्तान के समझौते के तहत भारत को पूर्वी नदियों – सतलज, ब्यास और रावी के पानी तक बिना किसी रोक-टोक के पहुँच हासिल है. जबकि पाकिस्तान ने पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी पर अपना अधिकार बनाए रखा है. पिछले साल, भारत ने समझौते की समीक्षा की मांग करते हुए पाकिस्तान को एक औपचारिक नोटिस भेजा था.

दरअसल, भारत दो जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है. इनमें एक है – झेलम की सहायक नदी किशनगंगा नदी पर किशनगंगा जलविद्युत परियोजना और दूसरा है चिनाब नदी पर बन रहा रैटल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट. पाकिस्तान ने इन दोनों परियोजनाओं पर आपत्ति जताई है. भारत ने मामले को एक न्यूट्रल एक्सपर्ट को सौंपे जाने के लिए अनुरोध किया था, जिस पर अब बात बनती दिख रही है.

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