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उत्तरप्रदेश

गाजीपुर का ‘गुलाबी मशरूम’, कैंसर से भी लड़ने में है कारगर; किसान कर रहे इसकी खेती

मशरूम एक ऐसा पोषक तत्वों से भरपूर आहार है, जिसे न केवल वेज प्रेमी, बल्कि नॉनवेज प्रेमी लोग भी चाव से खाते हैं. खास बात यह है कि मशरूम को घरों में बड़े आसानी से उगाया जा सकता है. यह पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण बहुत ही लाभकारी होता है.

मशरूम का सेवन करने से शरीर को आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ढींगरी मशरूम की एक गुलाबी प्रजाति भी है, जो कैंसर जैसे रोगों के इलाज में सहायक हो सकती है? यह गुलाबी मशरूम, जिसे ‘प्लुरोटस जामोर’ के नाम से जाना जाता है.

कृषि विज्ञान केंद्र के पौध सुरक्षा वैज्ञानिक ओंकार सिंह ने बताया कि गुलाबी रंग का ढींगरी मशरूम जिसे प्रयोग के तौर पर गाजीपुर में उगाने का प्रयास किया गया है, यह प्रयास सफल रहा है. अब इसके बाद इसे उत्पादन के लिए किसानों को भी दिया जाएगा.

कैंसर जैसे रोगों से लड़ने में काफी सक्षम

ओंकार सिंह ने बताया कि बताया कि इस मशरूम की खासियत यह है कि यह कैंसर जैसे असाध्य रोगों से लड़ने में काफी सक्षम होता है. साथ ही यह बैड कोलेस्ट्रॉल की समस्या को भी शरीर से दूर करने में मदद करता है. गुलाबी ऑयस्टर मशरूम में बहुत अधिक पोषक तत्व होते हैं.

इसमें विभिन्न प्रकार के प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज आदि होते हैं, जो प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने, सूजन से लड़ने और हृदय रोगों को रोकने में मदद करते हैं. यानी कि गुलाबी रंग का मशरूम देखने में जितना खूबसूरत होता है, उतना ही यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी होता है.

प्लुरोटस जामोर मूल रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया की प्रजाति है और यह प्लुरोटसी परिवार से संबंधित है. अभी तक गाजीपुर में इस प्रकार के मशरूम का उत्पादन नहीं हुआ था.

मशरूम की खेती काफी फायदेमंद

मशरूम की खेती हमेशा से किसानों के लिए काफी फायदेमंद रही है. इसकी खेती जिले के 25 से 30 किसान कर रहे हैं, जो जनपद के विभिन्न इलाकों में हैं. वहीं, बटन मशरूम की खेती भी जनपद के कई इलाकों में बड़े मात्रा में किसान कर रहे हैं और मालामाल हो रहे हैं.

इसे घर में भी लगा जा सकत हैं किसान

ओंकार सिंह ने बताया कि गुलाबी और सफेद रंग वाले ढींगरी मशरूम को आसानी से घर में भी लगाया जा सकता है. इसके लिए थोड़ा सा भूसा, प्लास्टिक बैग और एक छोटा सा कमरा चाहिए. इसके लिए धान का भूसा पानी में 15 से 20 घंटे भिगोने के बाद अतिरिक्त पानी निकालकर उसे प्लास्टिक बैग या गत्ते के डिब्बे में भरकर रखा जा सकता है.

प्रत्येक बैग में 5 ग्राम तक मशरूम के बीज डालने के बाद उसे अंधेरे कमरे में रखकर उचित तापमान में रखा जाता है, जिसकी आद्रता (Humidity) 85 से 90% होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि गुलाबी मशरूम मौजूदा समय में 200 से ₹300 प्रति 250 ग्राम बिकता है और सूखने के बाद इसका रेट ₹1000 किलो तक पहुंच जाता है.

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