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72 हजार रुपये के लिए मरीज को बनाया बंधक, एंबुलेंस चालक ने PMCH के बजाय पहुंचा दिया था जेपी अस्पताल

धनबादशहर के सरायढेला स्थित जेपी हॉस्पीटल ने रुपये के लिए मरीज को बंधक बना लिया था। हालांकि, बाद में उसे छोड़ दिया गया। दरअसल, गिरिडीह निवासी किशोर बाबूचंद हांसदा (16 वर्ष) को गंभीर हालत में गिरिडीह सदर अस्पताल से पीएमसीएच धनबाद रेफर किया गया था। एंबुलेंस चालक ने पीएमसीएच के बजाय उसे जेपी हॉस्पीटल पहुंचा दिया। अब अस्पताल प्रबंधक 72 हजार रुपये भुगतान के लिए उसे अस्पताल से छोड़ नहीं रहा है। पीड़ित परिवार ने माले नेता राजेश यादव एवं राजेश सिन्हा को अपना दुखड़ा सुनाया।

इसके बाद नेताओं ने डीसी राहुल कुमार सिन्हा को मामले की जानकारी देकर मदद की गुहार लगाई है। इसपर डीसी ने धनबाद जिला प्रशासन से बात करके यथाशीघ्र कार्रवाई करने का अनुरोध किया। वहीं, मामला प्रकाश में आने के बाद अस्पताल प्रबंधन दबाव में आ गया। इसके बाद देर रात को जेपी अस्पताल ने बिना भुगतान के ही मरीज को छोड़ दिया।

गिरिडीह के पहाड़पुर निवासी बाबूचंद हांसदा ने 16 मार्च की दोपहर गलती से कीटनाशक खा लिया था। इसके बाद उसे गिरिडीह के सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत देखते हुए पीएमसीएच धनबाद रेफर कर दिया। माले नेताओं ने बताया कि छ: बजे शाम यहां पहुंचते ही मरीज को भर्ती करते समय 10 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। परिजनों के पास पैसे नहीं थे, इसलिए दूसरे दिन जमा करने के लिए वक्त मांगा। किशोर की मां सुशीला देवी ने खेत बंधक रखा और दस हजार लेकर धनबाद अस्पताल पहुंची।

मरीज को नहीं मिली 108 एंबुलेंस : मरीज को सदर अस्पताल की तरफ से 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद मरीज के परिजन आनन-फानन में निजी एंबुलेस करके धनबाद पहुंचे। निजी एंबुलेस का चालक उन्हें कमीशन के लिए पीएमसीएच के बजाए जेपी अस्पताल पहुंचा दिया। गौरतलब है कि निजी अस्पतालों में एंबुलेंस चालकों और अस्पताल प्रबंधन के बीच कमीशन का खेल खुलेआम चलता है।

बाबूचंद हांसदा की हालत गंभीर थी। उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल से पीएमसीएच धनबाद रेफर किया गया था। 108 एंबुलेंस के लिए मरीज या उसके परिजनों को खुद संपर्क करना होता है। उसे एंबुलेंस नहीं मिलने पर अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करना चाहिए था। ऐसी स्थिति में निशुल्क एंबुलेंस की व्यवस्था की जाती। बाबूचंद के परिजन ने रेफर करने के बाद सदर अस्पताल के किसी भी डॉक्टर को 108 एंबुलेंस नहीं मिलने की जानकारी नहीं दी थी। -अवधेश कुमार सिन्हा, सिविल सर्जन, गिरिडीह

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