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पंजाब

पंजाब के सबसे महंगे टोल प्लाजा पर चल रहे बड़े Scam का पर्दाफाश, हुए चौंकाने वाले खुलासे

फिल्लौर: स्थानीय नैशनल हाईवे के सतलुज दरिया पर लगा लाडोवाल टोल प्लाजा जो देश के सबसे महंगे टोल प्लाजाओं में शुमार है, पर वाहन निकालने को लेकर एक बड़ा स्कैम चल रहा है जिसका एक समाजसेवी ने स्टिंग आप्रेशन कर उसे बेनकाब कर दिया। समाजसेवी को इस स्कैम का पर्दाफाश करने के लिए खुद उसका हिस्सा बनना पड़ा।

लाडोवाल टोल प्लाजा से कार के अप और डाऊन के चालक को 330 रुपए चुकाने पड़ते है जिसे लेकर जनता में रोजाना आक्रोश देखने को मिलता है। इस टोल प्लाजा पर अब टैक्सी चालकों व अन्य भार ढोने वाले वाहन जो लोकल कैटागरी में आते हैं उनके लोकल पास तक जो पहले 330 रुपए मासिक बनते थे, भी बंद कर दिए गए हैं। उनसे अब कई गुणा ज्यादा राशि वसूलकर उन्हें पास दिए जाते हैं।

एम्बुलैंस, मिलिट्री और पुलिस वाहन आदि के लिए होती है वी.वी.आई.पी. लेन, नहीं लगा होता कैमरा

लाडोवाल टोल प्लाजा पर एक वी.वी.आई.पी. लेन बनाई गई है जहां से मरीजों को लेकर जाने वाली एम्बुलैंस, मिलिट्री और पुलिस वाहन के अलावा बड़े राजनेताओं के वाहन गुजरते हैं। उस लेन पर हर वक्त लंबा जाम लगा रहता था जिसमें एम्बुलैंस और पुलिस वाहन फंसे रहते थे वहां पर रोजाना बहस का सिलसिला चलता था। आज सच्चाई सामने आई कि जो भी प्राइवेट या अन्य टैक्सी चालक होते उन्हें एक कोड वर्ड दिया जाता। वह वाहन चालक सीधा वी.आई.पी. लेन पर जाता, वहां खड़े कर्मचारियों को कोड वर्ड बताता जिसे सुनते ही वहां तैनात कर्मचारी अपने मोबाइल फोन के ग्रुप में वाहन का नंबर देखता और उसे वहां से बैरियर हटा कर निकाल देता।

जिस वाहन ने वहां से गुजरना होता उसका चालक पहले ही क्यू.आर. कोड के माध्यम से उनके खाते में 150 रुपए डाल देता जबकि वैसे आने-जाने के 330 रुपए वसूले जाते है। अगर फास्टैग नहीं चल रहा तो दोगुनी रकम वसूली जाती है, ऐसे वह मात्र 150 रुपए में वहां से निकल जाता। वी.आई.पी. लेन से दो नंबर के वाहन को इसलिए निकाला जाता था, क्योंकि इस लाइन में कोई कैमरा नहीं लगा होता।

टोल प्लाजा कर्मचारियों ने मिलीभगत कर फोन पर बनाया हुआ था व्हाट्सएप ग्रुप

स्माजसेवी ने बताया कि उसे भी एक दोस्त ने बताया कि अगर वह रोजाना या सप्ताह में 2 से 3 बार लाडोवाल टोल प्लाजा से गुजरता है तो वहां के कर्मचारियों के व्हाट्सएप ग्रुप का मैंबर बन जाए। उससे वह 150 रुपए में वी.वी.आई.पी. लेन से आ-जा सकता है। उसने ऐसा ही किया उसका वाहन हर बार वी.वी.आई.पी. लेन से गुजर जाता जिसके बाद समाजसेवी ने एक परमिट टैक्सी का नंबर भी ग्रुप में डाला उसे भी उन्होंने पैसे लेकर निकाल दिया।

लाडोवाल टोल प्लाजा पर गैंगस्टरों को दी हुई है नौकरी

इस स्कैम के अलावा दूसरी हैरानी की बात यह है कि इस टोल प्लाजा पर उन लड़कों को नौकरियां दी हुई हैं जिनका खुद का फिल्लौर सब-डिवीजन में मशहूर गैंग है और उनके ऊपर कई आपराधिक मुकद्दमे चल रहे हैं। इससे साफ पता चलता है कि अगर वहां से गुजरने वाला वाहन चालक किसी बात को लेकर प्लाजा कर्मचारियों से बहस करता है तो गैंग वहां पहुंच वाहन चालक को डरा-धमकाकर भगा सके। वाहन चालकों से मारपीट करने जैसे कई गंभीर आरोप प्लाजा कर्मचारीयों पर लग चुके हैं।

पहले भी 20 मिनट के डेढ़ लाख रुपए वसूलता मैनेजर हो चुका है बेनकाब

लाडोवाल टोल प्लाजा पर चल रहा यह स्कैम कोई नया नहीं है, इससे पहले प्लाजा का ठेका जिस कंपनी के पास था, उसका मैनेजर भी बड़ा स्कैम कर चुका है जिसका खुलासा पंजाब केसरी ने किया था। जिसके बाद सभी कर्मचारीयों के तबादले कर दिए गए थे।

वह मैनेजर रोजाना रात्रि को 20 मिनट के वाहन गुजारने के डेढ़ लाख रुपए वसूल लेता था। वह रोजाना रात्रि को उन बड़े वाहनों को एक साथ कतार में खड़ा कर लेता था जिनका प्लाजा से गुजरने का 10 हजार से ज्यादा का टैक्स होता था। सभी बड़े वाहनों को खड़ा करने के बाद प्लाजा कर्मचारी उनके पास जाता और उन्हें बता देता कि वे फलां नंबर बूथ से गुजरेंगे बूथ में बैठा कर्मचारी कैमरे के सामने कोई पेपर लेकर खड़ा हो जाता इतनी ही देर में सभी वाहन वहां से गुजर जाते।

50 मीटर दूरी पर मैनेजर को नहीं है स्कैम का पता?

इस संबंध में जब टोल प्लाजा के मैनेजर विपन राय से बात की तो उन्होंने पहले ऐसा स्कैम चलने से मना कर दिया। जब प्रतिनिधि ने उन्हें अपने मोबाइल फोन पर बनीं वीडियो दिखाई तो उन्होंने कहा वह इसकी जांच करवाएंगे। हैरानी की बात यह है कि मैनेजर से मात्र 50 मीटर की दूरी पर इतना बड़ा स्कैम चल रहा था जिसकी उन्हें जानकारी तक नहीं थी।

समाजसेवी ने मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर उठाई उचित कार्रवाई की मांग

समाजसेवी ने सड़क परिवाहन और राजमार्ग के मंत्री नीतिन गडकरी को सबूतों सहित सभी वीडियो भेजते हुए मांग की है कि देश के सबसे महंगे टोल प्लाजा पर कर्मचारी कैसे मिली भुगत कर इतना बड़ा स्कैम कर रहे है इसकी उच्च सतरीए जांच करवाई जाए जिससे आम जनता और सरकार को फायदा हो सके। लाडोवाल टोल प्लाजा की वी.आई.पी. लेन पर तैनात कर्मचारी जो कोड वर्ड सुनते ही वाहन निकलवा देते हैं, वाहन के गुजरने से पहले समाजसेवी द्वारा ग्रुप में भेजा गया गाड़ी का नंबर जिसके बाद बैरियर हट जाता है।

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