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देश के खिलाफ काम कर रहे सोशल मीडिया मंचों की खैर नहीं! संसदीय समिति ने उठाया कड़ा कदम

संसद की स्टैंडिंग कमिटी ने सूचनाओं की निगरानी करने वाले दो प्रमुख मंत्रालयों से पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश के खिलाफ काम करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया, इसकी जानकारी मांगी है. कमेटी ने 8 मई 2025 तक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है.

सूत्रों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली कम्युनिकेशन एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी संबंधी स्टैडिंग कमेटी ने इस बात को अपने संज्ञान में लिया है कि भारत में कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और प्लेटफार्म देश के हित के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिससे हिंसा भड़कने की आशंका है.

दो मंत्रालयों को लिखा पत्र

कमेटी ने इनफार्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग और कम्युनिकेशन एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालयों को लिखे पत्र में आईटी अधिनियम 2000 और इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी नियम, 2021 के तहत ऐसे मंचों पर प्रतिबंध लगाने के लिए की गई कार्रवाई का विवरण मांगा है. सूत्रों के मुताबिक, पत्र दोनों मंत्रालयों के संबंधित सचिवों को भेजा गया है और उनसे आठ मई तक जानकारी देने को कहा गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के खिलाफ कथित तौर पर सामग्री पोस्ट करने के बाद कई सोशल मीडिया हैंडल प्रतिबंधित कर दिए गए हैं.

आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत

बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने कम से कम 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी. इनमें ज्यादातर पर्यटक थे. भारत ने इस भयावह घटना के लिए पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी समूहों को जिम्मेदार बताया है. कमेटी के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद साकेत गोखले ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे से संबंधित कोई जानकारी नहीं है.

संसदीय समितियों की मर्यादा

उन्होंने दावा किया कि नियमों के मुताबिक, अध्यक्ष कमेटी की मंजूरी के बिना कोई बयान जारी नहीं कर सकते. गोखले ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, एक सदस्य के रूप में मुझे न तो कोई जानकारी दी गई है और न ही मैंने यह कहते हुए कुछ भी हस्ताक्षर किया है. उन्होंने लिखा, संसदीय नियमों के तहत, कोई अध्यक्ष कमेटी की मंजूरी के बिना कोई भी पत्र जारी नहीं कर सकता. संसदीय समितियों की मर्यादा होती है और राजनीतिक एजेंडे के लिए उन्हें हाईजैक नहीं किया जाना चाहिए.

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