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Shiv Sena UBT Crisis: उद्धव ठाकरे की बैठक से 6 सांसद नदारद; क्या टूटने वाली है शिवसेना UBT? जानें कानूनी पेच

नई दिल्ली: शिवसेना (UBT) में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। दिल्ली में बुलाई गई पार्टी की संसदीय दल की बैठक में 9 में से सिर्फ 3 सांसद ही पहुंचे। 6 सांसदों की अनुपस्थिति ने उद्धव ठाकरे खेमे की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी ने इन सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और संजय राउत ने सदस्यता रद्द कराने तक की बात कही है।

⚖️ क्या बागी सांसदों की जाएगी सदस्यता?

सवालों के घेरे में यह है कि क्या सिर्फ बैठक में न आने से किसी सांसद की सदस्यता जा सकती है? कानूनी जानकारों के अनुसार, ‘दलबदल कानून’ मुख्य रूप से सदन के भीतर मतदान या व्हिप के उल्लंघन से संबंधित है। केवल संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहने को सीधे तौर पर सदस्यता अयोग्यता का आधार नहीं माना जा सकता। हालांकि, पार्टी इसे ‘अनुशासनहीनता’ मानकर संगठनात्मक कार्रवाई जरूर कर सकती है।

🔄 क्या है ‘मर्जर क्लॉज’ का गणित?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि 9 में से 6 सांसद (जो कि दो-तिहाई बहुमत है) अलग होकर शिंदे खेमे में विलय का दावा करते हैं, तो वे संविधान की 10वीं अनुसूची के ‘मर्जर प्रावधान’ (Merger Clause) का सहारा ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) का होगा। यदि स्पीकर विलय को मान्यता देते हैं, तो उन्हें कानूनी सुरक्षा मिल सकती है।

🔍 स्पीकर के पाले में गेंद

वर्तमान में यह लड़ाई केवल 6 सांसदों की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिवसेना (UBT) के अस्तित्व के लिए एक बड़ी चुनौती है। एक तरफ उद्धव ठाकरे खेमा इसे बगावत बताकर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ बागी गुट संख्या बल के आधार पर कानूनी सुरक्षा की तलाश में है। अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष की अगली चाल पर टिकी हैं।

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