ब्रेकिंग
Weather Update: दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में गर्मी का कहर जारी; 11 जून से बारिश और राहत की उम्मीद Mamata Banerjee Silence: क्या इंडिया गठबंधन में कमजोर हुई ममता की पकड़? प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखीं 'न... Srinagar Crime News: ड्रग तस्करों पर श्रीनगर पुलिस का बड़ा प्रहार; ₹4 करोड़ की अवैध संपत्ति की गई जब्... Delhi Airport News: दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा; तेज हवाओं के कारण एयर इंडिया के 3 विमान क्षतिग्रस्... Ayodhya Ram Mandir Dispute: राम मंदिर ट्रस्ट पर अखिलेश के आरोपों से मचा सियासी घमासान; ब्रजेश पाठक क... Visakhapatnam Steel Plant Accident: विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में दर्दनाक हादसा; पिघला हुआ स्टील गिर... Delhi DDMA Meeting: दिल्ली फायर सर्विस में भर्ती होंगे पूर्व अग्निवीर; LG संधू ने मानसून और सुरक्षा ... Delhi Hotel Fire Case: मालवीय नगर अग्निकांड में बड़ा अपडेट; होटल अकाउंटेंट ने किया कोर्ट में सरेंडर Delhi High Court News: लुटियंस जोन पर हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी; कहा- 'दिल्ली को घोटना चाहते हैं क्य... Baghpat News: प्रेरणा कैंटीन का 94 हजार का बिल दबाए बैठे अधिकारी; संचालिका ने लगाए गंभीर आरोप
देश

कलेक्टर की जांच के बाद वक्फ संपत्ति सरकार की हो जाएगी? CJI के सवाल पर सरकार ने ये कहा

सुप्रीम कोर्ट में आज फिर एक बार वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो गई है. अदालत अंतरिम आदेश जारी करने के सवाल पर सुनवाई कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ इस विषय को सुन रही है. कल पौने चार घंटे तक याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वकीलों ने कानून में दसियों खामियां गिनवाईं. आज सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बचाव करते दिख रहे हैं.

केंद्र सरकार की ओर से एसजी मेहता ने आज दलील देने की शुरूआत कुछ यूं किया कि जिन व्यक्तियों द्वारा जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं, उनमें से कोई प्रभावित पक्ष या व्यक्ति नहीं है. संसद के पास विधायी क्षमता है या नहीं, ये सवाल ही नहीं है. यही एकमात्र आधार था जिस पर पहले किसी कानून पर रोक लगाई गई थी. मैं ये कहना चाहता हूं कि कुछ याचिकाकर्ता पूरे मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकतीं.

यहां पढ़ें अदालत के अपडेट्स

1. मेहता ने कहा कि अगर आपने खुद को वक्फ बाय यूजर के तौर पर रजिस्टर किया है तो यह दो अपवादों के साथ है यानी विवाद का मतलब होगा कि किसी निजी पक्ष ने मुकदमा दायर किया हो. मसलन ये कि यह मेरी संपत्ति है जिसे वक्फ घोषित किया गया है.अगर वक्फ संपत्ति के संबंध में निजी पक्ष के बीच कोई विवाद है तो यह सक्षम न्यायालय के निर्णय की तरफ से शासित होगा. हम वक्फ बाय यूजर से निपट रहे हैं.

2. मेहता ने कहा कि सरकार सभी नागरिकों के लिए ट्रस्ट के रूप में भूमि रखती है. वक्फ बाय यूजर की परिभाषा के अनुसार संपत्ति किसी और की है. आपने सिर्फ निरंतर उपयोग करने का अधिकार अर्जित किया है.ऐसे में जरूरी है कि निजी-सरकारी संपत्ति का उपयोग लंबे समय तक किया जाए. अगर कोई इमारत है जहां पर सरकारी संपत्ति हो सकती है.क्या सरकार यह जांच नहीं कर सकती कि संपत्ति सरकार की है या नहीं?

3. मेहता ने कहा कि शुरुआती विधेयक में कहा गया था कि कलेक्टर फैसला करेगा. आपत्ति यह थी कि कलेक्टर अपने मामले में खुद जज होगा. इसलिए जेपीसी ने सुझाव दिया कि कलेक्टर के अलावा किसी और को नामित अधिकारी बनाया जाए. इस पर सीजेआई गवई ने पूछा तो यह सिर्फ एक कागजी एंट्री होगी. तोमेहता ने कहा कि यह एक कागजी एंट्री होगी. लेकिन अगर सरकार स्वामित्व चाहती है तो उसे टाइटल के लिए मुकदमा दायर करना होगा. अगर कोई ट्रस्ट की संपत्ति से निपट रहा है तो उसे पता होगा कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सरकार मालिक है, ना कि वक्फ.

4. सीजेआई गवई ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की तरफ से जो तस्वीर पेश की जा रही है, वह यह है कि एक बार कलेक्टर जांच कर ले तो संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं रह जाएगी और एक बार जांच पूरी हो जाने पर पूरी संपत्ति सरकार के कब्जे में चली जाएगी. इसके जवाब में मेहता ने कहा कि हमें स्वामित्व के लिए टाइटल सूट करना होगा.जस्टिस मसीह ने पूछा तो जब तक कानून का सहारा नहीं लिया जाता, तब तक कब्ज़ा ऐसे ही जारी रहेगा? जवाब में एसजी ने कहा कि हां.

Related Articles

Back to top button