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भारत में क्यों नहीं बिक रही है गोल्ड ज्वैलरी, कहीं ये तो नहीं बन रहे कारण

सोने की बिक्री को लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट जारी हुई है. जिसमें बताया गया कि भारत में अक्षय तृतीया को छोड़कर गोल्ड ज्वैलरी की बिक्री में गिरावट आई है. आइए जानते हैं कि भारत में सोने के आभूषण क्यों नहीं बिक रहे हैं और इसके पीछे की असल वजह क्या है.

विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अप्रैल और मई की शुरुआत में सोने के आभूषणों की बिक्री, अक्षय तृतीया को छोड़कर कम रही. इसका बड़ा कारण सोने की ऊंची और अस्थिर कीमतें, इकोनॉमिक अनिश्चितताएं और कस्टमर्स का प्राइस स्टेबिलिटी का इंतजार करना रहा. कई खरीदारों ने लाइटवेट आभूषण चुने या फिर गोल्ड खरीदने का मन ही बदल दिया.

डिमांड आगे बढ़ सकती है

अप्रैल में सोने की कीमतें रिकॉर्ड 3,500 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंचीं, जो वीक अमेरिकी डॉलर, ग्लोबल टेंशन और गोल्ड ईटीएफ में इन्वेस्टमेंट के कारण 6% बढ़ीं. हालांकि, मई में ग्लोबल लेवल पर एलबीएमए गोल्ड पीएम की कीमत में 8% की गिरावट आई और भारत में रुपये की मजबूती ने इम्प्रूवमेंट को लिमिटेड रखा. डब्ल्यूजीसी का कहना है कि प्राइस स्टेबिलिटी से डिमांड बढ़ सकती है. क्योंकि सोना एक ट्रस्टेड इन्वेस्टमेंट माना जाता है.

2025 में अब तक एलबीएमए सोने की कीमत 22% बढ़कर 3,192 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस और भारत में स्पॉट गोल्ड प्राइस 23% बढ़कर 93,407 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है. अक्षय तृतीया के दौरान डिमांड मिक्स्ड रही. बड़े रिटेलर्स ने हैवी प्रमोशन और मार्केटिंग कैंपेन के दम पर बेहतर सेल्स देखीं, जबकि छोटे ज्वैलर्स को डिमांड में कमी का सामना करना पड़ा. बुलियन की सेल्स ज्वैलरी से बेहतर रही खासकर 5 ग्राम के कॉइन्स ‘टोकन’ खरीद के तौर पर पॉपुलर रहे. ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की सेल्स भी नोटिस करने लायक रही.

सेल्स वैल्यू बढ़ सकती है

रीजनल लेवल पर साउथ इंडिया में सेल्स बाकी हिस्सों से बेहतर रहीं. जबकि वेस्टर्न इंडिया में एवरेज परफॉर्मेंस रहा. अक्षय तृतीया पर सेल्स वॉल्यूम में कमी के बावजूद, सोने की कीमतों में 30% की बढ़ोतरी की वजह से टोटल सेल्स वैल्यू बढ़ने की उम्मीद है. पुराने ज्वैलरी का एक्सचेंज और रीसाइक्लिंग भी एक बड़ा ट्रेंड रहा, जो भारतीय मार्केट में गोल्ड डिमांड की स्ट्रेंथ दिखाता है.

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