ब्रेकिंग
Strait of Hormuz Updates: क्या है होर्मुज का नया सर्विस प्रोटोकॉल? जहां से होती है दुनिया की 20% तेल... Indore Honeytrap Case: इंदौर हनीट्रैप मामले में बड़ा एक्शन; श्वेता विजय जैन समेत 7 आरोपी भेजे गए जेल PoK Terror Network: 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद PoK में फिर सक्रिय हुआ लश्कर; हाफिज सईद के बेटे ने पूर्व ... Supreme Court Judgement: सैनिटरी पैड और शौचालय की कमी से पढ़ाई न छोड़ें लड़कियां; सुप्रीम कोर्ट की क... Delhi Metro Monday: दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने फिर किया मेट्रो और बस से सफर; सचिवालय पहुंचकर की ख... महंगाई पर सियासत: राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा तंज— 'इन्फ्लेशन मैन' किस्तों में काट रहे जनता की ... Delhi Gymkhana Club: दिल्ली का ऐतिहासिक जिमखाना क्लब होगा बंद! केंद्र सरकार ने 5 जून तक परिसर खाली क... Kanpur ITBP Jawan Case: कानपुर में ITBP जवान की मां का हाथ काटने का मामला; दूसरी जांच में दोनों अस्प... Jaisalmer Dumping Yard: जैसलमेर के बड़ाबाग डंपिंग यार्ड में खुले में मिले मृत गोवंश; लोगों में भारी ... भारतीय अर्थव्यवस्था: सिडबी के स्थापना दिवस पर बोलीं वित्त मंत्री— भारत में डर का माहौल बनाने की कोई ...
उत्तराखंड

चारधाम यात्रा में मौत… परिवार तक कैसे पहुंचेगा शव, क्या है प्रोसेस? यहां जानिए सभी सवालों के जवाब

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने शबाब पर है. पिछले महीने एक महीने से शुरू हुई इस चारधाम यात्रा में अब तक लाखों श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री आदि तीर्थस्थलों पर जाकर दर्शन पूजन किए हैं. अक्सर कथा कहानियों में सुनने को मिलता है कि जो बड़े भाग्यशाली होते हैं, वहीं चारधाम यात्रा के बाद जिंदा अपने घर लौटते हैं. यही वजह है कि सनातन धर्म में आम तौर पर सभी जिम्मेदारियों के निर्वहन के बाद चारधाम यात्रा की परंपरा रही है. अब बड़ा सवाल यह है कि चारधाम यात्रा के दौरान किसी की मौत हो जाए तो उसका शव परिवार तक पहुंचता है कि नहीं, यदि पहुंचता है तो कैसे और इसमें आने वाला खर्च कौन वहन करता है?

इसके साथ ही एक सवाल के साथ एक और सवाल कि ऐसा होने पर श्रद्धालु के परिजनों को कोई क्षतिपूर्ति भी मिलती है क्या? चूंकि इस साल चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद इसी एक महीने के अंदर 73 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. इसलिए ये सवाल लाजमी भी हैं. आइए, इस प्रसंग में हम इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने और जानने की कोशिश करते हैं. शुरूआत शुरू से ही करते हैं. उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा के लिए जाने वाले सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन करती है. इस दौरान सभी को दुर्घटना बीमा का विकल्प दिया जाता है. जो यात्री इस विकल्प को चुनते हैं, वह एक लाख के बीमे से कवर हो जाते हैं और यात्रा के दौरान मौत होने पर उनके परिवार को एक लाख रुपये का दुर्घटना क्लेम मिल जाता है.

उत्तराखंड सरकार भी देती है मुआवजा

चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड सरकार ने भी मुआवजा नीति बनाई है. इस नीति के तहत यात्रा के दौरान यदि किसी तीर्थयात्री की मृत्यु होती है तो सरकार उसके परिजनों के नाम कुछ मुआवजा राशि जारी करती है. हालांकि इसके लिए कुछ नियम बनाए गए हैं. इसमें तुरंत प्रशासन को सूचित करना होता है. इसके बाद प्रशासन शव का पोस्टमार्टम कराता है और सरकार को रिपोर्ट भेजी जाती है. इसके बाद मुआवजा राशि तय की जाती है. पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों तक भिजवाने की व्यवस्था भी स्थानीय प्रशासन करता है. पड़ोसी राज्यों में तो सड़क मार्ग से शव को भेजा जाता है, लेकिन सुदूर के राज्यों में हवाई मार्ग से शव भेजने की व्यवस्था है. हालांकि कई बार सूचना मिलने पर परिजन खुद मौके पर पहुंच जाते हैं और वहीं पर अंतिम संस्कार करते हैं. इसके लिए भी जरूरी इंतजाम लोकल प्रशासन करता है.

शव की पहचान महत्वपूर्ण

वैसे तो तीर्थ यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन होता है. इसके उनके बैकग्राउंड और परिवार के बारे में पूरी जानकारी होती है. बावजूद इसके शव की पहचान लोकल प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है. कई बार लोग अकेले ही यात्रा पर निकल पड़ते हैं. इस स्थिति में यह चुनौती और भी मुश्किल हो जाती है. जिन मामलों में मृतक बीमा कवर होता है, उसमें परिजनों को खुद ही मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अन्य जरूरी दस्तावेज लगाते हुए बीमा कंपनी में क्लेम करना होता है. हालांकि इस प्रक्रिया को असान बनाने के लिए कुछ एनजीओ भी सक्रिय हैं. परिजन इन एनजीओ के पदाधिकारियों के साथ मिलकर जरूरी औपचारिकताओं को पूरा कर सकते हैं.

Related Articles

Back to top button