ब्रेकिंग
मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: 'रोजगार दो या फैक्ट्री बंद करो' का दिया... Swatantra Bhardwaj Arrest: निशु आजाद के पिता से मारपीट मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को न्यायिक हिरासत... Punjab Swine Flu Alert: जालंधर में स्वाइन फ्लू से पहली संदिग्ध मौत, राज्य में 220 पहुंचा H1N1 मरीजों... Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन में 5 मंजिला हॉस्टल की इमारत ढही, मलबे में कई छात्रों के दबे हो... पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर बवाल: मान सरकार ने दर्ज कराया कड़ा विरोध बिहार में गंभीर बाढ़ संकट: 13 प्रभावित जिलों में प्रभारी मंत्री और सचिव करेंगे कैंप, राहत कार्यों की... बरेली-देहरादून अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश, 2.60 करोड़ की हेरोइन के साथ जब्बार खां गिरफ्तार सदाशिवपेट में 400 साल पुरानी ऐतिहासिक पुष्करिणी: इतिहास, संस्कृति और आस्था का बेजोड़ संगम नवी मुंबई के ऐरोली में दही हांडी उत्सव के दौरान हादसा: मानव पिरामिड गिरने से 34 वर्षीय गोविंदा की मौ... Sagar Hooch Tragedy: सागर के बंडा में जहरीली शराब का कहर, 11 लोगों की मौत; 25 अस्पताल में भर्ती
देश

कोर्ट ने लगाया स्टे ED फिर भी करती रही जांच, अब मद्रास हाई कोर्ट ने असिस्टेंट डायरेक्टर को भेजा नोटिस

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर विकास कुमार को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस फिल्म प्रोड्यूसर आकाश भास्करन की तरफ से दायर अवमानना याचिका पर जारी किया गया है. आकाश भास्करन का आरोप है कि हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर दिए जाने के बावजूद एजेंसी ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच जारी रखी.

जस्टिस एम.एस. रमेश और वी. लक्ष्मीनारायणन की डिवीजन बेंच ने ईडी से इस याचिका पर जवाब मांगा. साथ ही मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर के लिए तय की गई है.

स्टे के बाद भी ED ने जारी रखी जांच

डायरेक्टर ने कहा कि कोर्ट के मामले पर स्टे लगाने के बाद भी असिस्टेंट डायरेक्टर ने उन्हें कारण बताओ (show cause) नोटिस जारी किया था. इसी के बाद उन्होंने इसको लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मई 2025 में, ईडी ने आकाश भास्करन और उनके सहयोगी विक्रम रविंद्रन के ठिकानों पर छापे मारे थे. कई और चीजें जब्त की थीं. यह कार्रवाई तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) से जुड़े कथित ₹1,000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले के सिलसिले में की गई थी. ईडी ने साथ ही उनके घरों और दफ्तरों को सील कर दिया.

HC ने क्यों लगाया था स्टे

भास्करन और रविंद्रन ने इस कार्रवाई को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी, यह दलील देते हुए कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ऐसी सीलिंग की कोई कानूनी अनुमति नहीं है. 20 जून को हाई कोर्ट ने ईडी की सभी आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी, जब्त की गई सामग्रियों को तुरंत लौटाने और परिसरों को अनसील करने का आदेश दिया.

कोर्ट ने कहा कि सबूतों की कमी को देखते हुए एजेंसी की कार्रवाई “पूरी तरह अधिकार क्षेत्र से बाहर” थी. अगस्त 2025 में, हाई कोर्ट ने भास्करन की तीन याचिकाओं में समय पर काउंटर-एफिडेविट दाखिल न करने पर ईडी पर कुल ₹30,000 का जुर्माना भी लगाया गया था. इसी के बाद अब कोर्ट ने ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर को नोटिस भी जारी कर दिया है.

Related Articles

Back to top button