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बिहार

विकसित बिहार का विजन, सरकार के वादों का ब्यौरा… NDA जारी करेगा साझा घोषणा पत्र!

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की मजबूती का संदेश देने के लिए साझा घोषणा पत्र जारी करने की तैयारी है. इसमें अगले पांच साल के लिए एनडीए सरकार के वादों का ब्यौरा होगा. माना जा रहा है कि इस बार एनडीए विकसित भारत के लिए विकसित बिहार की थीम पर घोषणापत्र लाएगा. इसमें बिहार में निवेश में वृद्धि, युवाओं को रोजगार, महिलाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन आदि पर जोर होगा.

साल 2020 में बीजेपी और जेडीयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन तब दोनों पार्टियों ने अलग-अलग घोषणापत्र जारी किया था. सूत्रों के मुताबिक, सहयोगी दल एनडीए के साझा घोषणापत्र के अलावा चाहे तो अपना अलग से भी घोषणापत्र जारी कर सकते हैं. एनडीए के साझा घोषणा के पीछे मकसद एनडीए की एकजुटता और बिहार के लोगों के हित में साथ मिलकर काम करने का संदेश देना है.

एकजुटता का संदेश देने की कोशिश

दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव में जुटे एनडीए के सभी घटक दल एकजुटता का संदेश दे रहे हैं. कुछेक बयानों को छोड़ दे तो एनडीए के सभी सहयोगी एक साथ जमीन पर बिहार में जीत के लिए काम कर रहे है. दरअसल इस बार एनडीए की रणनीति शुरू से ही रही है कि जमीन पर भी कार्यकर्ता खुद को एनडीए का कार्यकर्ता समझे. ऐसा इसलिए क्योंकि अक्सर देखा गया है की दलों का गठबंधन तो हो जाता है पर जमीन पर कार्यकर्ताओं में दूरिया बनी रहती है इसलिए इस बार पहले बूथवार एनडीए के साझा कार्यक्रम किए गए ताकि बूथस्तर तक एनडीए के कार्यकर्ताओं की दूरियां मिट सकें.

उसके बाद जिलावार एनडीए के सम्मेलन किए गए जिसे राज्य और केंद्र के एनडीए के नेताओं ने संबोधित किया और अब बिहार में एनडीए के विधानसभाओं में भी साझा सम्मेलन आयोजित किए जा रहे है. विधानसभा-वार हो रहे इन सम्मेलनों को कार्यकर्ता सम्मेलन का नाम दिया गया है, जिसमें सभी पांचों सहयोगी दलों के कार्यकर्ता शामिल होते है और उस विधानसभा में एनडीए की जीत की रणनीति पर चर्चा करते है. इन विधानसभा वार कार्यकर्ता सम्मेलनों को भी एनडीए के नेता संबोधित करते हैं.

बनाई जाएगी चुनाव प्रबंधन समिति

सभी 243 विधानसभाओं में एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन 23 सितंबर तक पूरे करने हैं. अभी एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन का तीसरा चरण शुरू हो चुका है जिसमें 102 विधानसभाओं को कवर किया जाएगा. इसके पहले पहले चरण में 84 और दूसरे चरण में 57 विधानसभा में एनडीए के कार्यकर्ता सम्मेलन हो चुके हैं. इसके साथ ही इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए में बेहतर प्रबंधन और समन्वय के लिए सहयोगी दलों के साथ मिलकर लड़ने के लिए एक चुनाव प्रबंधन समिति बनाई जाएगी. इस समिति में बीजेपी और जेडीयू के नेताओं के साथ ही सहयोगी दलों के नेता भी रहेंगे. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक यह कदम सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल के लिए उठाया जा रहा है. बिहार चुनाव से जुड़े मुद्दे और फैसले मसलन प्रचार, प्रबंधन, साझा रैलियां, चुनावी मुद्दे और रणनीति का जिम्मा इस प्रबंधन समिति के जिम्मे होगा.

बिहार के युवाओं को NDA से जोड़ने के लिए BJP

हर विधानसभा में 10,000 मोदी मित्र बनाने का अभियान भी शुरू करने जा रही है जो 15 दिन तक चलेगा. ये मोदी मित्र डिजिटल सैनिक की तरह काम करेंगे, जो सोशल मीडिया पर बिहार के युवाओं खासकर फर्स्ट टाइम वोटरों को लालूराज के जंगलराज की याद दिलाएंगे. साथ ही मोदी मित्रों की जिम्मेदारी डिजिटल तरीके चुनाव प्रचार की होगी, जिसमें सरकार के कामकाज को सोशल मीडिया के माध्यम से युवा वोटरों तक पहुंचाया जाएगा. मोदी मित्र के पीछे बीजेपी का एक मकसद युवाओं के बीच प्रशांत किशोर फैक्टर को काउंटर करना भी है.

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