ब्रेकिंग
Nuh Gandhi Statue Desecration: नूंह के 'गांधी ग्राम' में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अपमान; रील बनान... President Droupadi Murmu Birthday: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्मदिन; पीएम मोदी, राजनाथ सिंह समेत... NEET Re-Exam Preparation: परीक्षा से पहले आज देशभर में NTA की 'मॉक ड्रिल'; जानें सुरक्षा और संचालन क... Karnataka Welfare Schemes: अब वोटर लिस्ट में नाम होने पर ही मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ; सीएम डीके ... Economic Crisis Allegations: महंगाई और बेरोजगारी पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर निशाना; RBI गवर्नर ने ... Maharashtra Politics: शिवसेना स्थापना दिवस पर शिंदे का शक्ति प्रदर्शन; राहुल गांधी और उद्धव गुट पर स... NEET UG Student Death: गाजियाबाद के प्रताप विहार में NEET की तैयारी कर रहे छात्र की मौत; जांच में जु... Ram Mandir Trust Investigation: चंदा चोरी के आरोपों पर योगी सरकार सख्त; CM बोले- 'अपराधी कोई भी हो, ... Firozabad Couple Death Mystery: फिरोजाबाद में शादीशुदा महिला और युवक की नहर में मिली लाशें; पुलिस जा... Tej Pratap Yadav Security Threat: तेज प्रताप यादव ने जताया अपनी जान को खतरा; आकाश यादव समेत 7 पर दर्...
धार्मिक

मां कूष्माण्डा को आज लगाएं ये विशेष भोग, बरसेगी कृपा, दूर होंगे सारे संकट!

नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्माण्डा को समर्पित है. 26 सितंबर को माता कूष्माण्डा की पूजा-अर्चना की जाएगी. ऐसा माना जाता है कि देवी कूष्माण्डा ने अपनी मंद मुस्कान से ही इस ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें ‘सृष्टि की आदिस्वरूपा’ भी कहा जाता है. मां कूष्माण्डा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है. उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, अमृत से भरा कलश, चक्र, गदा, जपमाला और कमल का फूल सुशोभित है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और सही भोग लगाने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य का आशीर्वाद देती हैं.

मां कूष्माण्डा को अति प्रिय हैं ये भोग

देवी कूष्माण्डा को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से मालपुए का भोग लगाया जाता है. यह भोग माता को बहुत ही प्रिय है.

मालपुआ: नवरात्रि के चौथे दिन भक्त श्रद्धापूर्वक घर में मालपुआ बनाकर माता को अर्पित करते हैं.

सफेद पेठा: मां कूष्माण्डा को सफेद पेठा भी अर्पित किया जाता है, जिसका एक नाम कूष्माण्ड भी है, इसीलिए माता का नाम ‘कूष्माण्डा’ पड़ा. आप चाहें तो पेठे की मिठाई या पेठे से बनी अन्य सात्विक चीज़ें भी भोग में शामिल कर सकते हैं.

पीले रंग की मिठाइयां: चूंकि मां कूष्माण्डा को पीला रंग प्रिय है, इसलिए भोग में पीले रंग की मिठाई, जैसे- केसर पेठा या केसरिया हलवा भी शामिल करना शुभ माना जाता है.

दही और हलवा: कई स्थानों पर मालपुआ के साथ दही और हलवा का भोग लगाने की भी परंपरा है, विशेषकर विवाहित महिलाओं को भोजन कराते समय.

भोग लगाने का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्माण्डा को मालपुए का भोग लगाने और फिर उस प्रसाद को किसी ब्राह्मण या गरीब को दान करने से बुद्धि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आता है. यह उपाय कुंडली में बुध ग्रह की कमजोर स्थिति को सुधारने में भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है.

मां कूष्माण्डा की पूजा विधि और शुभ रंग

नवरात्रि के चौथे दिन पीला रंग धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह रंग आनंद, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है.

पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां कूष्माण्डा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. मां को पीले फूल, पीले वस्त्र, सिंदूर, अक्षत (चावल) और सौभाग्य की सामग्री अर्पित करें. पूजन के दौरान धूप-दीप जलाएं और घंटी या मधुर ध्वनि का प्रयोग करें. माता को भोग के रूप में मालपुआ या ऊपर बताए गए अन्य प्रिय भोग अर्पित करें.मां के मंत्र ‘ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः’ का 108 बार जाप करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. आखिर में, मां कूष्माण्डा की आरती गाकर पूजा संपन्न करें और प्रसाद वितरित करें.

मां कूष्माण्डा की पूजा के लाभ

रोग-शोक से मुक्ति: माता कूष्माण्डा अपने भक्तों को सभी रोग-शोक से मुक्ति दिलाती हैं और उन्हें उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती हैं.

सकारात्मक ऊर्जा: इनकी उपासना से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

सुख-समृद्धि: मां की कृपा से भक्तों की आयु, यश, बल और धन में अपार वृद्धि होती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

मानसिक शांति: जो भक्त चिंता, भय या अवसाद से ग्रस्त हैं, उन्हें देवी कूष्माण्डा की पूजा से मानसिक शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है.

Related Articles

Back to top button