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राजस्थान

चित्तौड़गढ़ कांग्रेस में खुलकर आई गुटबाजी: ज़िला अध्यक्ष चयन बना ‘शक्ति प्रदर्शन’ का अखाड़ा, संगठन चुनाव पर विवाद

अंदर खाने वर्चस्व के विवाद से जूझ रही राजस्थान कांग्रेस के लिए चित्तौड़गढ़ जिले में संगठन सृजन अभियान शक्ति प्रदर्शन बनकर रह गया है. कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए पूरे प्रदेश में प्रदेश से पर्यवेक्षक भेजे गए, जिसका मकसद कार्यकर्ताओं से रायशुमारी कर संगठन को मजबूत करना है. इसी क्रम में सुभाषसनी यादव को चित्तौड़गढ़ में पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया है. जो 11 अक्टूबर से जिला अध्यक्ष पद के लिए कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रिपोर्ट तैयार कर रही हैं लेकिन जिले में मंडल स्तर की बैठकों में जिस तरह की स्थिति सामने आ रही है, उससे यह अभियान रायशुमारी की जगह शक्ति प्रदर्शन बनकर रह गया है.

चित्तौड़गढ़ मंडल में ऐसी स्थिति बनी कि पर्यवेक्षक के भाषण के दौरान नारेबाजी हुई, जिसे खुद उन्हें बीच में रोकना पड़ा. दूसरी ओर जिले के गंगरार में हुई बैठक के दौरान पर्यवेक्षक को पिछले दरवाजे से निकलकर जाना पड़ा. इससे साफ है कि कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई कम होती नहीं दिख रही है. ऐसे में जिला अध्यक्ष के पद के लिए नाम का चयन पर्यवेक्षकों के लिए भी चुनौती बना हुआ है.

सिर पर निकाय चुनाव और शक्ति प्रदर्शन हावी

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के दौरान जहां कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा, वहीं मारवाड़ को छोड़कर लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस खास प्रदर्शन नहीं कर पाई. चित्तौड़गढ़ जिले की मुख्यालय सहित कपासन, बडीसादडी, निंबाहेड़ा और बेंगू सीट पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा.

विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस जिले में अपना खाता भी नहीं खोल पाई वहीं लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के कद्दावर चेहरे उदयलाल आंजना को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने करारी शिकस्त दी है. ऐसी स्थिति में अब जहां निकाय चुनाव और पंचायती राज चुनाव होने की तैयारी है, वहां कांग्रेस को एक मजबूत जिला अध्यक्ष दिलाने की कोशिश नारेबाजी और शक्ति प्रदर्शन की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है.

कई पुराने तो कई नए चेहरे दौड़ में

कांग्रेस जिला अध्यक्ष के लिए कांग्रेस के कई कद्दावर नेताओं सहित नए चेहरे भी इस दौड़ में शामिल हैं. युवा चेहरों की बात की जाए तो आजाद पालीवाल का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है क्योंकि कांग्रेस संगठन में छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले पालीवाल संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं. वहीं, महेंद्र शर्मा रणजीत लोठ, अरुण कंडारा, विदेश जीनगर सहित बेगू क्षेत्र से प्रकाश धाकड़ जैसे चेहरे जिला अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं. महिला चेहरे के रूप में नीतू कंवर जिला अध्यक्ष की दावेदारी जता रही हैं. पुराने चेहरों में उदयलाल आंजना, प्रमोद सिसोदिया, बद्री लाल जाट हैं. चित्तौड़गढ़ के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत की प्रथम अनुशंसा के रूप में वर्तमान जिला अध्यक्ष भेरूलाल चौधरी को देखा जा रहा है.

गुटबाजी की भी दिख रही झलक

समय-समय पर कांग्रेस का नेतृत्व संगठन में गुटबाजी को नकारता रहा है लेकिन जिला अध्यक्ष के लिए ऐसे नाम सामने आए हैं जो किसी ने किसी तरह से प्रदेश में अलग-अलग नेतृत्व से जुड़े हुए हैं. उदयलाल आंजना प्रमोद सिसोदिया जैसे नाम प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा से जुड़े हैं. सुरेंद्र सिंह जाड़ावत खेमे की पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से नजदीकियां जगजाहिर हैं. नीतू कंवर भाटी सचिन पायलट खेमे से जुड़ी हुई हैं लेकिन कहीं ऐसे चेहरे हैं जिनको किसी गुट से जोड़कर नहीं देखा जा सकता.

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