छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव: बस्तरिया कला है प्रकृति की बोल, मिट्टी-जंगल से ही होता है इनका श्रृंगार, ETV भारत से बोले कलाकार- बदल रहा है बस्तर
रायपुर: छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. इसको लेकर के मुंबई रंगमंच के कई फिल्मी कलाकार भी छत्तीसगढ़ आए हुए हैं. तो वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम के कई आयोजन भी रायपुर में हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ की लोक कला और परंपरा को संजोने और संवारने का भी आयोजन किया गया है. खासतौर से बस्तर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं. इसमें वे आदिवासी नृत्य के साथ परंपरागत परिधान की झलक भी दिखा रहे हैं.
पूरे छत्तीसगढ़ की परंपरा की झलक: राज्योत्सव में प्रदेशभर के कलाकार आए हुए हैं. खासकर बस्तर संभाग के… उन कलाकारों ने ईटीवी भारत से बात करते हुए बताया कि, बस्तर में भी अलग-अलग तरह के नृत्य हो रहे हैं. हमारा दल ने जो नृत्य किया वो गौर नृत्य था. इसके अलावा मांदरी नृत्य की भी प्रस्तुति दी गई. हर दल अलग-अलग तरह के परिधान में आया हुआ था.
उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के भी कलाकार: बस्तर के अलावा एक दल बेमेतरा से भी आया था. उन्होंने बताया कि, वे करमा नृत्य पेश करने वाले हैं. कार्यक्रम के आयोजक मंडल के सदस्य ने ईटीवी भारत से बात करते हुए बताया कि संस्कृति को बचाने और संस्कृति को संजोने की कोशिश हमारे कलाकार कर रहे हैं. वे पूरी तरह से प्रकृति से जुड़े हुए हैं और प्रकृति को बचाने में लगे हैं. उनके वाद्य यंत्र, परिधान सभी में प्रकृति की झलक दिखती है.
कलाकारों ने श्रृंगार भी प्रकृति से जुड़ी चीजों से किया है. मोर पंख, बाकी पक्षियों के पंख, कौड़ी, जानवरों के सिंग जैसी चीजों को श्रृंगार के लिए इस्तेमाल किया गया है, यहां तक की वाद्य यंत्र भी मिट्टी से बने हुए हैं– आयोजक मंडल के सदस्य
जंगल ही इनका घर है: आयोजक मंडल ने बताया कि, ये लोग घने जंगलों के बीच जब नाचते और गाते हैं तो प्रकृति भी बोल उठती है. यह लोग वनांचल के साथी हैं और वनांचल इनका घर है. जब मैदानी या शहरी क्षेत्र के लोग जाते हैं तो उन्हें डर लग सकता है, लेकिन इनके लिए तो जंगल ही इनका घर है. नारायणपुर के कलाकारों ने बताया कि वहां किसी तरह का डर नहीं है नारायणपुर में अब किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है.
हो रहा है विकास: बिल्कुल दुरस्थ वनांचल गांवों से आए ये कलाकारों की मुस्कान भी बता रही थी कि वहां अब विकास हो रहा है. नक्सल जैसी समस्या भी खत्म होने की कगार पर है. कलाकारों ने कहा कि, नारायणपुर बिल्कुल शांत है, नक्सली अब वहां नहीं है, वहां पर कैंप खुल गया है. वहीं दंतेवाड़ा जिले से आए कलाकारों ने भी कहा कि, बस्तर में बदलाव हुआ है लेकिन जितना होना था उतना नहीं हुआ है अभी और बदलाव होना है, हालांकि बदलता बस्तर अब दिखने लगा है. हमारी पीढ़ी दर पीढ़ी इन कला और संस्कृति को संजोने का काम कर रही है.






