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छत्तीसगढ़

राज्योत्सव में पहुंचे 10 फीट के अमिताभ बच्चन, एक राजा और एक वीरा ने भी जमाया रंग

बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ इस बार अपनी स्थापना का 25वां उत्सव मना रहा है.राजधानी रायपुर से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालयों में इसे लेकर रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. बलौदाबाजार में भी जिलास्तरीय राज्योत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इस बार कार्यक्रम में विशाल आकार के मॉस्कोट यानी बड़े पुतले लोगों के आकर्षण का केंद्र बने. इन मॉस्काट्स में प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन, एक राजा और एक वीरा को शामिल किया गया था.जिनके साथ लोग सेल्फी ले रहे थे.

कार्यक्रम में डाली जान : राज्योत्सव के पंडाल में जैसे ही ये मॉस्कॉट पहुंचे वैसे ही कार्यक्रम में जान आ गई. बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इन विशाल पुतलों के पास जाकर सेल्फी लेते नजर आए. मॉस्कॉट के रंगीन पोशाक, जीवंत भाव और पारंपरिक डिजाइन ने सभी का ध्यान खींचा. कठपुतली और नाट्य कला मंच बिलासपुर की निदेशक किरण मोइत्रा ने ETV भारत को बताया कि ये पुतले विशेष रूप से रजत महोत्सव की थीम के अनुरूप तैयार किए गए हैं.

राज्योत्सव में नया रंग : किरण मोइत्रा पिछले 25 वर्षों से छत्तीसगढ़ की लोककला को संजोए हुए हैं. उनके मुताबिक कठपुतली कला सिर्फ बच्चों के मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने का प्रभावी माध्यम भी है. उन्होंने कई कार्यक्रमों में स्वच्छता, शिक्षा, और नशा मुक्ति जैसे विषयों पर भी कठपुतली नाटक किए हैं. इस बार राज्योत्सव के लिए कुछ नया और भव्य रूप देने का प्रयास किया गया है.

अमिताभ बच्चन सबसे लोकप्रिय : कार्यक्रम स्थल पर जब विशाल आकार के अमिताभ बच्चन आए तो छोटे बच्चों का उत्साह चरम पर पहुंच गया. कई बच्चों ने कहा कि ये “शोले वाले अमिताभ” हैं, तो कुछ ने “कौन बनेगा करोड़पति” की याद दिलाई. भीड़ में मौजूद एक स्कूली छात्रा ने मुस्कुराते हुए कहा कि हमने टीवी में तो अमिताभ जी को देखा है, लेकिन इतना बड़ा रूप कभी नहीं देखा. बहुत मजेदार लग रहा है.पुतले का आकार लगभग दस फीट ऊंचा था, जिसके कारण वो पूरे पंडाल में दूर से ही नजर आ रहा था. राजा और रानी के रूप वाली अन्य पुतले भी पारंपरिक परिधानों और आकर्षक गहनों से सजे थे. कई लोगों ने इन्हें सेल्फी पॉइंट नाम दे दिया.

सांस्कृतिक माहौल में लोककला का स्पर्श : राज्योत्सव के मंच पर जहां एक ओर लोकनृत्य और लोकगीतों की गूंज थी, वहीं दूसरी ओर इन मॉस्कॉट्स ने पारंपरिक कला के जिंदा होने का एहसास कराया. कार्यक्रम में पहुंचे कई कलाकारों और शिक्षकों ने कहा कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है ताकि वे मोबाइल और इंटरनेट से परे भी कुछ नया अनुभव कर सकें.

आजकल बच्चे मोबाइल में ही खोए रहते हैं। लेकिन इन कठपुतलियों को देखकर उनके चेहरे पर जो खुशी दिख रही है, वही सबसे बड़ी सफलता है- प्रेमलाल साहू, स्थानीय

सेल्फी जोन में लगी भीड़ : आपको बता दें कि तीनों मॉस्कॉट के सामने लगातार भीड़ जुटी रही. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग एक-एक तस्वीर लेने को बेताब नजर आए. जिला प्रशासन को कई बार लोगों को लाइन में खड़ा करवाना पड़ा ताकि अफरा-तफरी की स्थिति न बने.युवाओं ने सोशल मीडिया पर इन पुतलों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से शेयर किए, जिससे यह आयोजन ऑनलाइन भी चर्चा में आ गया.

रविवार को शुरु हुआ राज्योत्सव : इससे पहले छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ और रजत जयंती के अवसर पर बलौदाबाजार जिला मुख्यालय में रविवार शाम राज्योत्सव का भव्य और रंगारंग शुभारंभ हुआ. पंडित चक्रपाणी शुक्ल शासकीय हाई स्कूल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की भीड़ उमड़ी.

अतिथियों ने 25 वर्षों पर डाला प्रकाश : मंच पर प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में मौजूद रहे, जबकि जिले के प्रभारी एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल अति विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए.कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. इस अवसर पर अतिथियों ने प्रदेश के 25 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित किया और जिले के विकास में जनता की सक्रिय भागीदारी की सराहना की.

जिला स्तरीय राज्योत्सव केवल सांस्कृतिक समारोह नहीं, बल्कि उपलब्धियों का उत्सव भी बना. इस दौरान अलग-अलग विभागों ने हितग्राहियों को सामग्री वितरण किया गया. साथ ही साथ पंचायतों को सम्मानित किया गया. महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बाल विवाह मुक्त 225 पंचायतों और स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मुक्त 60 पंचायतों के सरपंच व सचिवों को सम्मानित किया गया. समाज कल्याण विभाग द्वारा 86 बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को ट्राइसिकल वितरित किए गए.

  • “हम होंगे कामयाब” योजना के तहत 72 युवाओं को प्रशस्ति पत्र दिए गए.
  • आदिवासी विकास विभाग ने 4343 विद्यार्थियों को 2 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की.
  • स्वामित्व योजना अंतर्गत 18200 किसानों को स्वामित्व कार्ड सौंपे गए.

रजत जयंती वर्ष में यह राज्योत्सव सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा का उत्सव है. यह उस राज्य का जश्न है जिसने 25 सालों में संघर्ष से सफलता तक का सफर तय किया है. हर विभाग की प्रदर्शनी, हर कलाकार की प्रस्तुति और हर ग्रामीण की मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि छत्तीसगढ़ अब आत्मनिर्भर और सशक्त राज्य के रूप में उभर चुका है.

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