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छत्तीसगढ़

फिल्मी स्टाइल में सूदखोर दबोचा! वीरेंद्र तोमर को पकड़ने पुलिस बनी इलेक्ट्रीशियन, पहले बिजली काटी, फिर फ्लैट में घुसकर किया गिरफ्तार

रायपुर। सूदखोरी और धमकी देकर वसूली करने वाला चर्चित सूदखोर वीरेंद्र तोमर आखिरकार पुलिस के शिकंजे में है। शनिवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सिरोल थाना क्षेत्र की विंडसर हिल्स टाउनशिप से गिरफ्तार हुए तोमर को पुलिस ने सोमवार को कोर्ट में पेश कर पांच दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस अब उसके नेटवर्क, सहयोगियों और फरार चल रहे भाई रोहित तोमर के ठिकानों का पता लगा रही है।

तीन दिन तक पुलिस घात लगाती रही, फिर चली ‘फिल्मी’ चाल

पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए तोमर की लोकेशन ट्रेस कर ली थी, लेकिन वह लगातार फ्लैट के अंदर बंद था। आखिरकार शनिवार को पुलिस ने फिल्मी अंदाज में कार्रवाई की योजना बनाई। टीम ने सोसाइटी के प्रमुख से बात कर फ्लैट की बिजली कटवाई। इसके बाद एक जवान को इलेक्ट्रीशियन बनाकर भेजा गया।

जवान ने अपना हुलिया मिस्त्री जैसा बनाया और सोसाइटी में प्रवेश किया। जब वह तोमर के फ्लैट तक पहुंचा, तब वहां काम करने वाला कुक भी मौजूद था। मौके का फायदा उठाकर जवान ने चुपके से तोमर की फोटो खींची और टीम को भेजी। ओके का संकेत मिलते ही पुलिस की बाकी टीम अंदर घुस गई और तोमर को दबोच लिया।

करोड़पतियों की कॉलोनी में छिपा था सूदखोर

विंडसर हिल्स टाउनशिप ग्वालियर की पाश और हाई सिक्योरिटी कॉलोनी मानी जाती है, जहां करोड़ों रुपये के फ्लैट हैं। यहां नेताओं, अफसरों और बड़े व्यापारियों के घर हैं। सवाल उठ रहा है कि इतनी महंगी कालोनी में तोमर कैसे और किसके माध्यम से रह रहा था। माना जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।

सहयोगी फरार, कई नाम आ सकते हैं सामने

पुलिस अब वीरेंद्र तोमर से उसके सहयोगियों के नाम और आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। कई ऐसे सहयोगी हैं, जो गिरफ्तारी के बाद से अचानक शहर छोड़कर गायब हैं। जांच में और भी नए नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

क्या है मामला

वीरेंद्र तोमर और उसका भाई रोहित तोमर राजधानी समेत प्रदेशभर में लंबे समय से सूदखोरी, रंगदारी और धमकी देकर संपत्ति हड़पने जैसे मामलों में सक्रिय थे। पुलिस को इनके खिलाफ दर्जनों शिकायतें मिली थीं, लेकिन रसूख और नेटवर्क के चलते कार्रवाई मुश्किल हो रही थी। हाल ही में बढ़ती शिकायतों के बाद पुलिस ने कड़ी कार्रवाई शुरू की और वीरेंद्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया।

एक महीने में सात एफआईआर

तोमर ब्रदर्स के खिलाफ जून महीने में मारपीट, वसूली, ब्लैकमेलिंग और सूदखोरी के सात मामले दर्ज हुए थे। इनमें एक केस तेलीबांधा और छह पुरानी बस्ती थाने में दर्ज हैं। किसी भी केस में पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। दोनों एफआइआर के बाद उत्तर प्रदेश भाग गए, वहां से राजस्थान और बाद में मध्य प्रदेश पहुंचे।

केवल कपड़े सुखाने के लिए हाथ बाहर निकालता था

पुलिस सूत्रों के अनुसार वीरेंद्र तोमर करीब दो महीने से उसी आलीशान फ्लैट में छिपा हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने खुद को पूरी तरह फ्लैट में बंद कर लिया था। पुलिस के डर से वह गैलरी तक में नहीं निकलता था और जरूरत पड़ने पर केवल कपड़े सुखाने के लिए हाथ बाहर निकालता था और कपड़े वहीं गिरा देता था।

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