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पंजाब

सोने की आसमान छूतीं कीमतें, क्या शादियों से गुम हो जाएंगे भारी गहने?

ज़ीरा/ फिरोजपुर: पंजाब में माघ महीना शुरू होते ही विवाहों का मौसम जोर पकड़ चुका है, लेकिन इस रौनक के बीच इस बार सबसे बड़ी चर्चा सोने की लगातार बढ़ रही कीमतों को लेकर है। जहां पंजाबी विवाह परंपराओं में सोना और सोने के गहने एक अहम हिस्सा माने जाते हैं, वहीं मौजूदा दामों ने मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर ही तोड़ दी है।

पिछले कुछ महीनों से सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंच चुकी हैं। पहले जहां परिवार अपनी बेटियों के विवाह के लिए 4 से 6 तोला तक गहने आराम से तैयार कर लेते थे, वहीं अब हालात इतने कठिन हो गए हैं कि लोग 1 या 2 तोला लेकर ही काम चलाने को मजबूर हैं। कई जगह परिवार सोने के बजाय चांदी या कृत्रिम गहनों की ओर रुख कर रहे हैं। ज्वेलरों का कहना है कि इस बार व्यापार 30 से 40 प्रतिशत तक नीचे चला गया है और बड़े ऑर्डर बहुत कम आ रहे हैं।

भारत में सोने की खपत अधिकतर शादियों में ही होती है
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमत बढ़ने के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हैं। वैश्विक बाजार में अस्थिरता रहने पर निवेशक सबसे अधिक सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है, जहां हर वर्ष 700 से 800 टन सोना खपत होता है और इसमें सबसे बड़ा हिस्सा विवाहों का होता है। पंजाब भी इस स्थिति से अलग नहीं है। हर साल 22 से 25 टन सोना केवल पंजाब में खपत होता है और इसका सबसे बड़ा हिस्सा विवाह सीजन में ही बिकता है। लेकिन इस बार मांग आधी से भी कम रह गई है। लोग छोटे कुंडल, हल्के चूड़े या केवल एक साधारण सेट तक सीमित होकर रह गए हैं। पंजाब के गांवों में इसका असर और भी ज़्यादा है। गांवों में विवाह के समय सोने की तैयारी एक सामाजिक मान-सम्मान मानी जाती है, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों ने इस परंपरा को कमजोर कर दिया है। अमीर परिवारों पर इस बढ़ोतरी का लगभग कोई असर नहीं पड़ा है।

वे पहले की तरह भारी गहने खरीद रहे हैं और रीतियां निभा रहे हैं। अगर कीमतें यूं ही बढ़ती रहीं तो सोना कुछ परिवारों का ही शौक बनकर रह जाएगा आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी समय में सोने की कीमतें इसी तरह ऊंची रहीं, तो पंजाब की विवाह परंपराओं में बड़ा बदलाव संभव है। कृत्रिम गहनों की मांग और बढ़ेगी तथा सोना एक सीमित वर्ग का प्रतीक बन जाएगा। कई समाज विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव के गहरे और लंबे प्रभाव देखने को मिलेंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि पंजाब में सोने को केवल गहनों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि एक आर्थिक सुरक्षा के रूप में भी देखा जाता है। लोग इसे भविष्य की कठिन परिस्थितियों के लिए संजोकर रखते हैं। बढ़ी हुई कीमतों के बीच बंगलों और कड़े की जगह अब अंगूठी ने ले ली है, जो कि पहले भी प्रचलित तो रही है, परंतु अब यह मजबूरी बनती जा रही है। कुल मिलाकर, सोने की बढ़ती कीमतें सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं हैं, बल्कि इन्होंने पंजाब के विवाह तरीकों, सामाजिक परंपराओं और पारिवारिक योजनाओं को गहराई से प्रभावित किया है। यह रुझान कितने समय तक चलेगा, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि सोना अब पहले जैसा प्रत्येक परिवार के लिए सुलभ विवाह परंपरा का हिस्सा नहीं रहा।

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