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ढैय्या और साढ़ेसाती से चाहिए मुक्ति? शनिदेव के इन प्रसिद्ध मंदिरों में करें दर्शन, दूर होंगे सारे कष्ट!

 शनिदेव को हिंदू धर्म में न्याय का देवता यानी कर्मफलदाता माना गया है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार अच्छा या बुरा फल देते हैं. सभी देवी-देवताओं की तरह शनिदेव के भी देश में कई मंदिर हैं जहां पूजा करने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं. दरअसल, शनिदेव की पूजा घर पर करना उचित नहीं माना जाता है, इसलिए भक्त उनकी पूजा मंदिर में करने जाते हैं. भारत में शनिदेव के बहुत से लोकप्रिय मंदिर हैं, जिनकी अपनी-अपनी मान्यताएं हैं. इस लेख में हम आपको बताएंगे उन्हीं में से कुछ प्रसिद्ध शनि मंदिर के बारे में.

श्री शनि धाम मंदिर

दक्षिण दिल्ली के असोला गांव में स्थित श्री शनि धाम मंदिर भारत का सबसे बड़ा शनि मंदिर माना जाता है. यहां शनिदेव की एक विशाल मूर्ति और यंत्र स्थापित हैं. इसके अलावा, श्री शनि धाम को ‘दुनिया का सबसे बड़ा शनि मंदिर’ माना जाता है और यहां शनि देव की अष्टधातु से बनी दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा है.

शनि शिंगणापुर मंदिर

शनि शिंगणापुर मंदिर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है, जो अपनी खुली छत के नीचे स्थित स्वयंभू शनि देव की प्रतिमा के लिए जाना जाता है।. यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है और यहां पर भक्त शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए दूर-दूर से आते हैं. शनि शिंगणापुर मंदिर अपने अद्वितीय वास्तुशिल्प के लिए जाना जाता है.

तिरुनल्लार शनि मंदिर

तिरुनल्लार शनि मंदिर पांडिचेरी के कराईकल जिले में स्थित है और शनि देव के नवग्रह मंदिरों में से एक माना जाता है. इसे शनि दोष को दूर करने वाला माना गया है, जिसे धरबारण्येश्वर मंदिर भी कहते हैं. यह मंदिर शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए बहुत प्रसिद्ध है. भक्त यहां पर आकर नल तीर्थम में पवित्र स्नान करते हैं और शनि देव से प्रार्थना करते हैं.

कोकिलावन शनि मंदिर

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित यह शनिदेव के तपोस्थल के रूप में जाना जाता है. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए शनिदेव ने यहां तपस्या की थी. कहते हैं कि शनिदेव की तपस्या से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें कोयल (कोकिला) के रूप में दर्शन दिए थे. इसलिए इस वन को “कोकिलावन” कहा जाने लगा. इस मंदिर को एक सिद्ध धाम माना जाता है और यहां परिक्रमा करने से शनि देव के कष्टों से मुक्ति मिलती है और शनि देव का प्रकोप शांत होता है.

शनिचरा मंदिर ग्वालियर

मध्य प्रदेश में ग्वालियर से 18 किमी दूर मुरैना जिले में बने शनि मंदिर को शनिश्चरा मंदिर कहा जाता है, जिसका इतिहास रामायण काल से जुड़ा है. यह मंदिर देश के सबसे प्राचीनतम शनि मंदिरों में से एक है और शनिदेव के यहां विराजित होने के कारण इस जगह को बहुत ही प्रभावशाली माना गया है. इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां लोग शनि को तेल चढ़ाने के बाद उन्हें गले लगाते हैं.

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