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धार्मिक

सावन में गूंज रहे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे, डिंडौरी के ऋण मुक्तेश्वर धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

डिंडौरी (मध्य प्रदेश): पवित्र सावन मास के शुभारंभ के साथ ही देश भर के शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंज रहे हैं। मध्य प्रदेश में भगवान शिव के अनेक पौराणिक और एतिहासिक धाम हैं, परंतु डिंडौरी जिले में स्थित ‘ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर’ की महिमा अत्यंत अनूठी और हृदय को छू लेने वाली है। सनातन मान्यता है कि सावन के पावन अवसर पर इस धाम में श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन और जलाभिषेक करने से भक्तों को सांसारिक व आर्थिक कर्ज से ही नहीं, अपितु पितृ ऋण, देव ऋण और गुरु ऋण से भी सदैव के लिए मुक्ति प्राप्त हो जाती है।

🏛️ 1000 साल पुराना दुर्लभ पश्चिममुखी मंदिर, कल्चुरी काल की स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना

मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर कुकर्रामठ गांव में स्थित यह भव्य शिव मंदिर करीब 1000 वर्ष प्राचीन माना जाता है।

इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण कल्चुरी राजवंश के शासनकाल (8वीं से 10वीं शताब्दी) में हुआ था। वास्तुकला की दृष्टि से जहाँ अधिकांश शिव मंदिर पूर्व दिशा की ओर अभिमुख होते हैं, वहीं यह मंदिर दुर्लभ रूप से ‘पश्चिममुखी’ है। मंदिर के गर्भगृह में लगभग 3 फीट ऊंचा अलौकिक शिवलिंग स्थापित है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसकी ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए इसे राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया है।

🐕 साहूकार, लाखा बंजारा और वफादार कुत्ते की कथा, ऐसे पड़ा गांव का नाम ‘कुकर्रामठ’

इस मंदिर की स्थापना और ‘कुकर्रामठ’ नामकरण के पीछे अत्यंत मार्मिक इतिहास जुड़ा हुआ है।

प्राचीनकाल में कंचनीपुर (वर्तमान कुकर्रामठ) में लाखा बंजारा नामक व्यापारी रहता था। उसने आर्थिक तंगी के कारण अपने चतुर व वफादार कुत्ते को एक साहूकार के पास गिरवी रख दिया। एक रात साहूकार के घर चोरी होने पर कुत्ते ने सूझबूझ से छिपाया गया खजाना बरामद करवा दिया। साहूकार ने प्रसन्न होकर बंजारे का संपूर्ण कर्ज माफ कर दिया और कुत्ते के गले में ऋण-मुक्ति पत्र बांधकर उसे आजाद कर दिया।

रास्ते में कुत्ते को आते देख लाखा बंजारे ने समझा कि कुत्ता भागकर आया है और क्रोध में लाठी मारकर उसकी जान ले ली। पत्र पढ़ने के बाद पश्चाताप में बंजारे ने अपने वफादार कुत्ते (स्थानीय भाषा में ‘कुकुर’) की याद में यहाँ स्मारक बनवाया, जिससे आगे चलकर इस स्थान का नाम ‘कुकर्रामठ’ पड़ा।

🔱 पांडवों ने एक ही रात में किया था निर्माण, अधूरा रह गया था मंदिर का गुंबद व कलश

मंदिर के अपूर्ण शिखर को लेकर द्वापर युग की एक अन्य पौराणिक कथा प्रचलित है।

माना जाता है कि अपने अज्ञातवास की अवधि के दौरान पांडवों ने इस दिव्य मंदिर का निर्माण एक ही रात्रि में प्रारंभ किया था। पांडवों की चेष्टा थी कि सूर्योदय से पूर्व मंदिर का शिखर और स्वर्ण कलश स्थापित कर दिया जाए। यद्यपि, भोर (प्रातःकाल) हो जाने के कारण गुंबद पर कलश की स्थापना पूर्ण नहीं हो सकी और मंदिर का ऊपरी भाग अधूरा ही रह गया। वर्तमान में भी मंदिर के ऊपरी भाग में एक समतल प्लेटफॉर्म स्पष्ट दिखाई देता है।

👮 सावन मेले को लेकर पुलिस व ASI का कड़ा पहरा, श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता इंतजाम

सावन मास में भगवान ऋण मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन हेतु प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं।

भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के दृष्टिगत स्थानीय पुलिस प्रशासन तथा ASI की टीमों द्वारा पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। कोतवाली थाना प्रभारी के नेतृत्व में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि सभी भक्त सुगमतापूर्वक एवं शांतिपूर्ण वातावरण में बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक और दर्शन-पूजन संपन्न कर सकें।

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