रेलवे ने किया प्रशासन को गुमराह, लॉकडाउन में पार्सल ट्रेन से आए रेलकर्मी तथा उनके परिजन

रांची। पार्सल ट्रेन से किसी भी यात्री को लाने से इन्कार कर रहे रेलवे ने आखिरकार स्वीकार कर लिया कि 17 अप्रैल को हावड़ा से हटिया पहुंची ट्रेन में दवा के साथ रेलकर्मी और उनके परिजन भी रांची पहुंचे थे। रेलवे ने माना कि ट्रेन में रेलकर्मी और उनके परिजन आए थे। रेलकर्मी इलाज कराने के लिए कोलकाता गए थे जिनके साथ उनके परिजन भी थे। यात्रियों के पहुंचने के मामले में रेलवे ने जिला प्रशासन को गुमराह करने का काम किया है।
परिवहन विभाग को बताई सच्चाई
रांची रेल मंडल ने अपने पत्र में परिवहन सचिव को सच्चाई की जानकारी दी है। रेलवे इस बात को मानने से इंकार कर रहा है कि रेलकर्मी यात्री की श्रेणी में आते हैं । जबकि ऐसी अवस्था में रेलवे द्वारा प्रशासन को रेल कर्मियों की आने की सूचना देनी चाहिए थी। लेकिन रेलवे ने ऐसा नहीं किया। मामला उजागर होने के बाद भी इसकी कोई सूचना जिला प्रशासन को नहीं दी गई। अगर प्रशासन को दी गई होती, तो रेल कर्मियों की स्क्रीनिंग और जांच भी की जाती। पर ऐसा करना रेलवे ने उचित नहीं समझा।
परिवहन विभाग ने डीआरएम से मांगी थी रिपोर्ट
बताया जाता है कि रेलवे ने अपने पत्र में परिवहन विभाग को जानकारी दी है कि 17 अप्रैल को पार्सल ट्रेन में 6 रेल कर्मी, उनके साथ चार परिजन और तीन आरपीएसएफ के जवान थे। उल्लेखनीय है कि 2 दिन पहले परिवहन विभाग ने डीआरएम से रिपोर्ट मांगी थी। वहीं, चक्रधरपुर, आद्रा, आसनसोल रेल डिविजन के डीआरएम को रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।
इस मामले में रांची रेल डिविजन ने बयान जारी कर कहा था कि स्पेशल ट्रेन में अत्यंत महत्वपूर्ण मेडिकल उपकरण का स्टॉक लेकर एक विशेष ट्रेन खडग़पुर, टाटा, चक्रधरपुर, हटिया, आद्रा होते हुए चलायी गयी थी। कुछ व्यक्ति इस ट्रेन में उपस्थित थे वे रेलकर्मी थे, जो मेडिकल उपकरण तथा दवाइयां को पहुंचाने के लिए आये थे। वहीं अपना कार्य पूर्ण होने के बाद वह उसी ट्रेन से वापस चले गये। जबकि अपने पत्र में रेलकर्मी द्वारा हटिया स्टेशन से उतरकर घर जाने की कोई जानकारी नहीं दी गई है ।






