ब्रेकिंग
जबलपुर में देशभक्ति का अनूठा जुनून: उफनती नर्मदा नदी में एक हाथ में तिरंगा थामकर 7 किमी तैरे तैराक, ... मध्य प्रदेश के धार का प्रसिद्ध 'बाग प्रिंट' पहुंचा राष्ट्रपति भवन, 'एट होम' समारोह की बढ़ाएगा शोभा बालाघाट के आदिवासी गांवों में रहस्यमयी बीमारी और मलेरिया का कहर: डेढ़ माह में मासूमों की मौत, स्कूल ... जब क्लास में 'गुरुजी' बने गुना कलेक्टर: किशोर कन्याल ने ब्लैकबोर्ड पर बच्चों को पढ़ाया पाठ, सिखाया '... इंदौर: नगर निगम ARO जितेंद्र पांडे के ठिकानों पर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, 31 साल की नौकरी में बना... एमपी बोर्ड 10वीं-12वीं परीक्षा 2027 की तारीखें घोषित: 17 फरवरी से 12वीं और 24 फरवरी से 10वीं के एग्ज... जबलपुर रेल मंडल का टिकट चेकिंग दस्ता फुल एक्शन मोड में, 4 महीने में वसूला 28 करोड़ का रिकॉर्ड जुर्मा... लखनऊ में सनसनीखेज वारदात: जानकीपुरम में पत्नी ने लोहे के तवे से वार कर ली पति की जान, 5 साल से चल रह... महाराष्ट्र की आश्रमशालाओं में 2 साल के भीतर 584 छात्रों की मौत, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे... भारी विरोध के बाद झुकी बार काउंसिल ऑफ इंडिया: NALSAR छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक का आदेश BCI ने लिया...
पंजाब

प्रोफेसर (डॉक्टर) पुनीत गुप्ता हुए सम्मानित, हजारों साल पुरानी लिपि को किया डिकोड

नई दिल्ली: जैन प्राच्यविद्या शोध संसथान इंदौर द्वारा मण्डी हिमाचल प्रदेश के शोध कर्ता प्रोफेसर (डॉक्टर) पुनीत गुप्ता को पांच हज़ार साल पुरानी हड़प्पा लिपि को डिकोड करने के लिए नई दिल्ली में आयोजित पंच कल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव   में जैन मुनि श्री 108 प्रज्ञासागर जी द्वारा सम्मानित किया गया।

प्रोफेसर (डॉक्टर) पुनीत गुप्ता ने सभी 4000 हड़प्पा लिपि अभिलेखों को डिकोड कर लिया है। उनके इस अभूतपूर्व कार्य ने हड़प्पा की रिक्तता को किनारा करते हुए लिखित रूप में पुनः प्राप्त कर लिया है। पहली बार, सभी 700 से अधिक चिह्नों की लिपि को पूरी तरह से डिकोड किया गया है। इन सभी हड़प्पा चिन्हों का ध्वन्यात्मक मानों के साथ व्यवस्थित रूप से मानचित्रण के कार्य को पूरा किया गया। प्रोफेसर (डॉक्टर) के हड़प्पा यूनिकोड प्रस्ताव में एक मानकीकृत डिजिटल फ़ॉन्ट का विकास करना शामिल है, जिससे हड़प्पा की लिपि को यूनिकोड में एकीकृत किया जा सके।

प्रोफेसर (डॉक्टर) गुप्ता ने हड़प्पा सभ्यता के सभी 4000 मौजूदा अभिलेखों की पहली पूर्ण डिकोडिंग करते हुए, उनके अर्थ को निर्धारित करने में एक क्रांतिकारी सफलता की घोषणा की है। एक अभिनव डिजिटल रंग-कोडित प्रणाली का उपयोग करते हुए, डॉ. गुप्ता ने हड़प्पा सभ्यता के अक्षरों और शब्दों को अनुमानों या परिकल्पनाओं के आधार पर अक्षर-अक्षर और शब्द-अक्षर डिकोड किया है। डॉ. पुनीत गुप्ता (एम.बी.बी.एस., एम.डी., डी.एन.बी., डी.एम., एम.बी.ए.) द्वारा छोटे और बड़े अक्षरों वाले हड़प्पनअबुगिदा का पता पहली बार चिकित्सा विज्ञान के ध्वनिविज्ञान के माध्यम से चला।

एक प्रैक्टिशनर ऑन्कोलॉजिस्ट और ए.आई.एम.एस. फरीदाबाद के कैंसर चेयरमैन व एम.वी.एन. यूनिवर्सिटी के प्रो. (डॉ.) पुनीत गुप्ता के अनुसार, “हड़प्पा के समरूप चिह्न मानव के जबड़े और जीभ की गतिविधियों की जैविक समरूपता को प्रतिबिंबित करते हैं। हड़प्पा भाषा को बाय-कैमरल अबुगिडा सिस्टम (बा.अ.फ) सिस्टम कहा जाता है। हड़प्पा की भाषा के प्रत्येक विशिष्ट उच्चारण के लिए दो स्वतंत्र चिह्न (गैर-संयुक्त चिह्न) निर्दिष्ट किए गए हैं। यह बा.अ.फ इसकी व्याख्या और भारत के पांडुलिपि लेखन के लिए बहुभाषी कीबोर्ड की उत्पत्ति की गुप्त कुंजी प्रदान करता है। अब एक ही कंप्यूटर की-बोर्ड के द्वारा हड़प्पा की ब्राह्मी, अशोक-ब्राह्मी, कुषाण-ब्राह्मी, प्राकृत, पाली, गुप्ता-ब्राह्मी, संस्कृत, तमिल-ब्राह्मी, श्रीलंका-ब्राह्मी, हिंदी, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और अतीत व वर्तमान की सभी विशेषकर मात्रा भारतीय लिपियों को लिखने में मदद कर सकता है।”

Related Articles

Back to top button