Gujarat Politics: पूर्व CM शंकर सिंह वाघेला की फिर होगी कांग्रेस में वापसी? नई पार्टी का ऐलान टाला; आलाकमान से बातचीत जारी

गुजरात की राजनीति से एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता शंकर सिंह वाघेला ने एक बार फिर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताई है।
वाघेला ने आगामी 2 अक्टूबर को अपनी नई राजनीतिक पार्टी के औपचारिक ऐलान की योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, वाघेला और पार्टी नेतृत्व के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के बाद उनकी संगठनात्मक भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर पार्टी आलाकमान (हाईकमान) के स्तर पर अंतिम चर्चा होना बाकी है, जिसके बाद ही उनकी वापसी पर आधिकारिक मुहर लगेगी।
🎙️ ‘हाईकमान से चल रही है बातचीत’: प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने की मुलाकातों की पुष्टि
कांग्रेस संगठन और वाघेला के रुख पर प्रदेश नेतृत्व का बयान:
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सकारात्मक बातचीत का दौर: गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने पुष्टि करते हुए कहा कि शंकर सिंह वाघेला की कांग्रेस में वापसी को लेकर पार्टी हाईकमान के साथ गहन विचार-विमर्श चल रहा है।
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असंतुष्ट नेताओं का जमावड़ा: चावड़ा ने कहा कि वर्तमान में भाजपा से असंतुष्ट कई प्रमुख नेता कांग्रेस के संपर्क में हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि भाजपा के खिलाफ केवल कांग्रेस ही एक मजबूत और साझा राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत कर सकती है।
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आक्रामक तेवर: उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वाघेला लंबे समय से केंद्र व राज्य में भाजपा, आरएसएस (RSS) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की मुखर आलोचना करते रहे हैं।
🔄 ‘प्रजा शक्ति’ पार्टी से अकेले चुनाव लड़ने का था दावा: सूत्रों के मुताबिक बदले राजनीतिक समीकरण
हालिया राजनीतिक बयानों और बदले रुख का विश्लेषण:
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पार्टी को दोबारा किया था सक्रिय: शंकर सिंह वाघेला ने कुछ समय पहले ही अपनी ‘प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी’ को पुनर्जीवित करने की घोषणा की थी।
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अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान: उन्होंने सार्वजनिक मंचों से कहा था कि वे 2027 का गुजरात विधानसभा चुनाव अपने दल के बैनर तले अकेले लड़ेंगे और यहां तक कह दिया था कि अब कांग्रेस में लौटने का वक्त बीत चुका है।
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अचानक बदला फैसला: हालांकि, अब अंदरूनी राजनीतिक समीकरण बदलते ही खबर पुख्ता हो चुकी है कि वाघेला कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ लगातार तालमेल बना रहे हैं और नई पार्टी के विस्तार को फिलहाल रोक दिया गया है।
📜 1995 में BJP से बगावत से लेकर RJP तक: बापू का सियासी सफरनामा
शंकर सिंह वाघेला के ऐतिहासिक राजनीतिक पड़ाव:
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1995 में भाजपा से अलग: वाघेला ने वर्ष 1995 में भाजपा से बगावत कर राष्ट्रीय जनता पार्टी (RJP) का गठन किया था।
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कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री: इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली और बाद में 1998 में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया।
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2017 में कांग्रेस से इस्तीफा: वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया और उनके साथ कई विधायकों ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
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जन विकल्प मोर्चा का प्रयोग: 2017 में उन्होंने ‘जन विकल्प मोर्चा’ बनाकर चुनाव लड़ा, लेकिन उनका कोई भी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सका।
⚖️ 2019 में NCP और अब गांधीनगर निगम चुनाव: कांग्रेस की वाघेला के नेटवर्क पर नजर
गांधीनगर चुनाव और क्षेत्रीय प्रभाव की अहमियत:
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NCP में संक्षिप्त पारी: वर्ष 2019 में वाघेला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हुए और कुछ समय तक राष्ट्रीय महासचिव रहे, जिसके बाद उन्होंने वहां से भी इस्तीफा दे दिया।
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वसंत वागडो से नई शुरुआत: नवंबर 2024 में उन्होंने अपने गांधीनगर स्थित आवास ‘वसंत वागडो’ में समर्थकों के साथ बैठक कर प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी को आगे बढ़ाया था और 2 अक्टूबर से अभियान छेड़ने वाले थे।
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आगामी चुनावों पर नजर: अब गांधीनगर नगर निगम (GMC) के चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में उत्तर गुजरात और क्षत्रिय समुदाय में वाघेला के गहरे प्रभाव, व्यक्तिगत नेटवर्क और सियासी कद को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व उनकी वापसी को लेकर बेहद संजीदगी से विचार कर रहा है।





