14 साल की उम्र घर से भागी किशोरी, 12 साल बाद पति और 4 साल के बच्चे के साथ लौटी

भोपाल: छोटी-छोटी बातों पर नाराज होकर नाबालिग बच्चे घर छोड़ रहे हैं. भोपाल समेत पूरे मध्य प्रदेश में इस प्रकार की घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है. हालांकि इनमें से कई बच्चे गलत रास्ते या गलत लोगों के चक्कर में आकर अपना जीवन बर्बाद कर देते हैं. तो कोई मानव तश्करी के चंगुल में फंस जाता है. लेकिन भोपाल पुलिस ने ऐसी 69 लड़कियों और 11 लड़कों को खोजने में सफलता पाई है, जो घर वालों से नाराज होकर घर से भागे थे. ये बच्चे अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर शोषण और मजदूर की जिंदगी जीने का मजबूर थे.
पति और बच्चे के साथ लौटी गुमशुदा
राजधानी के पिपलानी थाना क्षेत्र में रहने वाली एक 8वीं कक्षा की 14 वर्षीय लड़की अपने मां से नाराज होकर साल 2013 में घर से भाग गई थी. उसकी मां टीचर हैं. बच्ची घर से गुस्सा होकर निकली थी. माता-पिता ने बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस बीते 12 सालों से बच्ची को खोज रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिली. लेकिन पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान के तहत एक बार फिर इस केस की नए सिरे से जांच शुरू की गई.
इसके लिए एक विशेष टीम गठित की गई. टीम द्वारा संदेहियों तथा गुमशुदा के परिजनों से पूछताछ के बाद जानकारी मिली कि ये गुमशुदा एक साल पहले रायसेन में एक बच्चे और अपने पति के साथ देखी गई थी. इसके बाद भोपाल पुलिस रायसेन में घूम फिर कर संदेही तथा गुमशुदा से जुड़े लोगों पर नजर रखना शुरू किया. परिजनों की कॉल डिटेल पर नजर रखी गयी. इसी बीच एक व्यक्ति ने अपना नाम न बताए जाने की शर्त पर बताया कि वह लड़की अपने पति और बच्चे के साथ चेन्नई में रहती है तथा कुछ समय पहले भोपाल में कुछ काम से आए हैं. जिसके बाद पुलिस ने इस संभावित स्थानों पर तलाश कर उस लड़की को दस्तयाब किया.
लड़की ने बताई 12 साल की कहानी
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अवधेश गोस्वामी ने बताया कि दस्तयाब की गई महिला ने बताया कि 12 साल पहले वह घर से निकलकर भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंची और वहां से गुजरात जाने वाली ट्रेन में बैठ गई. वहां से बहुत दिनों तक गुजरात रेलवे स्टेशन पर रुकी एवं काम की तलाश करती रही. लेकिन काम नहीं मिलने से वापस भोपाल आई, पर घर नहीं गई. इसी समय रायसेन निवासी युवक जो बच्ची का परिचित था स्टेशन पर मिल गया जो कि चेन्नई में काम करता था. लड़की ने युवक को अपनी परेशानी बताई, तो लड़की लड़के के साथ चेन्नई चली गई. जब उसकी उम्र 18 साल पूरी हो गई तो दोनों ने शादी कर ली. इस प्रकार गुमशुदा को 13 वर्ष बाद दस्तयाब किया जा सका.
12वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंक लाने के बाद भागी
एक अन्य मामले में थाना स्टेशन बजरिया क्षेत्र निवासी 17 वर्षीय नाबालिग लड़की जनवरी 2025 में घर छोड़ कर भाग गई थी. इस बच्ची के 12वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंक मिले थे. लेकिन पिता से अनबन होने के कारण बच्ची ने घर छोड़ दिया था. पुलिस ने लड़की की तलाश के लिए दूरदर्शन, सोशल साइट्स का सहारा लिया. माता-पिता के मोबाइल की सीडीआर निकाली गई. भोपाल रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज देखे जाने पर गुमशुदा लड़की गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन (15024) में अकेली बैठती दिखाई दी. पुलिस द्वारा दस्तयाब किए जाने के बाद लड़की ने बताया कि वह और पढ़ना चाहती थी. परन्तु कुछ पारिवारिक कठिनाइयों का सामना कर रही थी और इसीलिए घर छोड़कर चली गई थी. भोपाल स्टेशन से ललिलतपुर तक गई और वहां से उतरकर कुछ घंटे रुकने के बाद इंदौर चली गई.
इंस्टाग्राम में रील बनाई तो पता चली लोकेशन
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मोनिका शुक्ला ने बताया कि बागसेवनिया थाने में एक 16 वर्षीय बच्ची के गुम होने की रिपोर्ट बीते 7 नवंबर को दर्ज कराई गई थी. इस गुमशुदा बच्ची को बंगलोर से 400 किमी दूर डिन्डीगुल नामक जगह पर डॉलर फैक्ट्री से दस्तयाब कर भोपाल वापस लाया गया. बालिका ने बताया कि माँ से झगड़ा होने पर वह घर छोड़कर चली गई और भोपाल रेलवे स्टेशन पर मद्रास जाने वाली ट्रेन में बैठ गई.
रास्ते में महिला कम्पार्टमेंट में किसी महिला यात्री द्वारा डिन्डीगुल नामक जगह पर फैक्ट्री में काम मिल जाने की बात बताने पर वह उसी महिला के साथ डिन्डीगुल पहुंच गई और वहीं फैक्ट्री के आवासीय हॉस्टल में रहकर काम करने लगी. फैक्ट्री में गुमशुदा की एक सहेली जो कि फैक्ट्री के हॉस्टल में उसकी रूम पार्टनर थी, ने उसके मोबाइल से अपनी इंस्टाग्राम पर फोटो डाला.
नाबालिग ने दो-तीन बार अलग अलग आईडी बनाकर अपने फोटो डाले थे, जिसमें आवासीय हॉस्टल का बैकग्राउंड था. यह जानकारी पड़ोस में रहने वाले लड़के ने गुमशुदा के माता पिता को दी. इस लड़के से पूछताछ करने पर उसने एक बार फोन कॉल आने की जानकारी दी. इस नंबर की लोकेशन सर्च की गई तो डिन्डीगुल की लोकेशन मिली. कॉल करने पर फोन नंबर बंद मिला. इसी मिलान के आधार पर डिन्डीगुल के लिए भोपाल पुलिस की टीम रवाना हुई. जहां से उस बालिका को सुरक्षित बरामद किया गया.






