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मध्यप्रदेश

नेशनल स्कूल गेम्स में लापरवाही, दरारों भरे ट्रैक से गिरकर छात्र घायल, कई टीम्स को फूड पॉइजनिंग

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में इन दिनों स्कूल नेशनल रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है. जो मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित है. देश भर के अलग अलग राज्यों के 1100 से ज्यादा लोग हिस्सा ले रहे हैं. लेकिन इस आयोजन को लेकर लापरवाही अव्यवस्था जैसे आरोप लग रहे हैं और जिम्मेदार कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं.

30 राज्यों से 29 टीम, 1162 ने किया पार्टिसिपेट
असल में ग्वालियर के एक निजी स्कूल में चार दिवसीय 69 वां स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) नेशनल रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप की शुरुआत हुई है. यह प्रतियोगिता एसजीएफआई और मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग का संयुक्त कार्यक्रम है. जिसमें देश के लगभग सभी राज्यों से 29 टीमें आई है. और इन टीम्स को मिलकर 1162 प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया है.

29 दिसंबर तक होगा आयोजन
25 दिसंबर को इस चैंपियनशिप का आधिकारिक शुभारंभ हुआ और इसके बाद से ही अव्यवस्था और लापरवाहियों को लेकर खबरें आने लगीं. एक तरफ पार्टिसिपेट टीम्स स्केटिंग ट्रैक को लेकर परेशान नजर आई तो वहीं कई लोगों को खराब खाने की वजह से फूड पॉइजनिंग की शिकायत हुई. हालत तब बदतर हुए जब बीमार होने के बाद मेडिकल ट्रीटमेंट तक नसीब नहीं हुआ. ये प्रतियोगिता आगामी 29 दिसंबर तक चलेगी.

टीम्स ने स्केटिंग ट्रैक पर खड़े किए सवाल
असल में निजी स्कूल में बने स्केटिंग ट्रैक को लेकर ज्यादातर टीम्स और पार्टिसपेंट बच्चों के अभिभावकों का कहना था कि, ये ट्रैक नेशनल चैंपियनशिप के पैमानों के मुताबिक नहीं है, ट्रैक पर क्रैक्स है. जिनकी वजह से कुछ बच्चे चोटिल भी हुए. हालांकि ज्यादातर टीम के लोग इस बात के डर में कुछ नहीं कहना चाहते कि इसका उनके बच्चों के पार्टिसिपेशन पर असर ना पड़ जाये.

कर्नाटक से अपने बच्चे साथ आये एक अभिभावक आकाश ने बताया कि, ”ट्रैक कम से कम 200 मीटर का होना चाहिए, लेकिन यहां ट्रैक उससे कम है, दूसरा स्केटिंग का ट्रैक कर्वी होना चाहिए थे लेकिन इस आयोजन में जो ट्रैक इस्तेमाल हुआ वह फ्लेट है जिसकी वजह से कॉर्नर पर बच्चों को काफी स्ट्रगल करना पड़ रहा है. क्योंकि स्केटिंग के बच्चे जिन ट्रैक्स पर प्रैक्टिस करते हैं वह भी इंटरनेशनल टर्म्स के हिसाब से बने होते हैं, उनके मुकाबले यह ट्रक छोटा भी है.”

फूड पॉइजनिंग के शिकार झारखंड के एचओडी
वहीं झारखंड से आई टीम तो इस प्रतियोगिता में लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार हुई. झारखंड से स्केटिंग के 42 बच्चों की टीम लेकर आए सरकारी एचओडी सुमित शर्मा ने बताया कि, ”ये राष्ट्रीय स्तर की स्कूल गेम्स प्रतिस्पर्धा है, लेकिन उन्हें यहां बुलाया गया तो ट्रांसपोर्ट की प्रॉब्लम हुई. यहां आने जाने के लिए बस की सुविधा नहीं बच्चे ऐसी ठंड में परेशान होते रहे. यहां खाना खाने के बाद सुमित समेत कई बच्चों और पेरेंट्स को फूड पॉइजनिंग हो गई. लेकिन अस्पताल ले जाने के लिए कोई एम्बुलेंस तक नहीं थी. इसके बाद हमे यहां से एक गाड़ी से दूर अस्पताल पहुंचाया. जहां ना ठीक से ट्रीटमेंट किया गया ना दवा दी गई. बल्कि उसका बिल और गाड़ी का किराया भी हमसे ही वसूला गया.

‘कोई शिकायत लेने को तक तैयार नहीं था’
सुमित ने बताया कि, ”इस संबंध में उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास भी किया लेकिन मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के ग्वालियर जेडी से लेकर किसी भी अथॉरिटी ने शिकायत नहीं ली. शुक्रवार को भी सुबह आठ बजे से बुलाया लेकिन ना तो कोई रूम दिया ना ही जगह. सभी बच्चे अपने सामान के साथ शाम चार बजे तक बाहर बैठे रहे.”

‘बेटी सामने उल्टियां कर रही थी, इलाज तक नहीं मिला’
झारखंड से ही अपनी बेटी के साथ आई एक महिला गुंजा मजूमदार ने बताया कि, ”उनकी बेटी यहां पार्टिसिपेट करने आई थी लेकिन यहां खाना खाने के बाद गुरुवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई. लेकिन यहां मेडिकल टीम तक ठीक से इलाज नहीं दे सकी. यहां को किसी तरह की मेडिकल फैसिलिटी नहीं है. हमें रात में बेटी को लेकर सरकारी अस्पताल में जाना पड़ा तब जाकर उसे इलाज मिल सका.” उन्होंने बताया कि, यह हालत कई बच्चों के साथ बने हैं.

जॉइंट डायरेक्टर बोले- आयोजन में कोई कमी नहीं
वहीं, इन हालातों के बारे जब ETV भारत ने शिक्षा विभाग के जॉइंट डायरेक्टर अरविंद सिंह से बात की तो उनका कहना था कि, उनके पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई. अगर शिकायत आएगी तो वे जांच करायेंगे.” साथ ही उनका कहना था कि, ”ये खेल ही ऐसा है बच्चे गिरते हैं चोट लगती है. जो ट्रैक पर क्रैक्स हैं उनसे किसी बच्चे को नुकसान नहीं हो सकता. उन्होंने खुद वहां जाकर देखा है, उनके हिसाब से उन्हें कोई कमी इस आयोजन में नजर नहीं आई है.”

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