Bihar Politics: बंगले पर घमासान! राबड़ी देवी को बंगला खाली करने के आदेश पर भड़की RJD, सम्राट चौधरी का पलटवार

बिहार की राजनीति में सरकारी बंगले एक बार फिर केंद्र बिंदु बन गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने का आदेश मिलने के बाद से आरजेडी और एनडीए सरकार के बीच तनातनी बढ़ गई है। आरजेडी ने इसे सरकार द्वारा की जा रही ‘बदले की राजनीति’ करार दिया है, जबकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकारी आवास जनता की सेवा के लिए होते हैं, न कि किसी की बपौती।
⚔️ सम्राट चौधरी का विपक्ष पर तीखा हमला
सरकारी बंगले को लेकर विपक्ष के आरोपों पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “हम जनता की सेवा के लिए आए हैं, घर की चिंता छोड़िए। जिस दिन हमारी पार्टी और नेता कहेंगे कि आपका काम खत्म हो गया, मैं महज 24 घंटे के अंदर अपना झोला उठाकर अपने निजी घर चला जाऊंगा।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आरजेडी को जनता के काम से ज्यादा बंगलों की चिंता है।
⚖️ विवाद का मुख्य कारण: 10 सर्कुलर रोड
विवाद की जड़ पटना स्थित ’10 सर्कुलर रोड’ का बंगला है, जिसमें वर्तमान में राबड़ी देवी और उनका परिवार रह रहा है। यह बंगला अब राज्य के मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। आरजेडी के प्रवक्ता एजाज अहमद और प्रधान राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने इस फैसले को विपक्षी दलों को प्रताड़ित करने का एक तरीका बताया है। सिद्दीकी ने सीएम आवास और लोक सेवक आवास के नाम पर हो रहे विस्तार पर भी सवाल उठाए हैं।
🏛️ आरजेडी की कोर्ट जाने की तैयारी
आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने आरोप लगाया कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का अपमान करना है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि बंगलों का आवंटन नियमों के तहत नहीं हो रहा है। विरोध स्वरूप, आरजेडी अब इस मामले को कानूनी चुनौती देने यानी कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है, जिससे राज्य में बंगले को लेकर जारी यह सियासी घमासान और लंबा खिंच सकता है।
संपादकीय टिप्पणी: सरकारी संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में होना चाहिए, लेकिन अक्सर बंगलों की राजनीति जनहित के मुद्दों को पीछे छोड़ देती है। क्या आपको लगता है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों या नेताओं के लिए सरकारी आवास संबंधी नियमों को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाने की जरूरत है? अपने विचार नीचे साझा करें।






