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बिहार में प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल, 3 महीनों में 2 कार्यपालक अधिकारियों की हत्या से मचा हड़कंप

पटना (बिहार): बिहार में लगातार पैर पसारती आपराधिक घटनाओं ने अब सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। बीते महज तीन महीनों के भीतर दो अलग-अलग नगर परिषदों के कार्यपालक अधिकारियों (Executive Officers) की जघन्य हत्याओं ने राज्य के संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करने वाले अधिकारी अब स्वयं को भारी असुरक्षा के साये में महसूस कर रहे हैं। इन क्रूर वारदातों के बाद जहाँ प्रशासनिक महकमे में आक्रोश और खौफ व्याप्त है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर हैं।

🚔 औरंगाबाद में कार के भीतर ईओ विमल कुमार की हत्या, चालक ने लोहे की रॉड से लिया जान

ताजा एवं सनसनीखेज मामला औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र का है।

डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) विमल कुमार की रविवार देर रात निर्मम हत्या कर दी गई। वे अपना शासकीय कार्य निपटाने के उपरांत पटना लौट रहे थे, तभी धनौती पुल के पास उनकी कार के अंदर ही उन पर जानलेवा हमला हुआ। पुलिस की वैज्ञानिक जांच में उनके ही सरकारी चालक मिथिलेश की संलिप्तता स्पष्ट हुई, जिसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ड्राइवर ने कार में रखी टायर खोलने वाली लोहे की रॉड से विमल कुमार के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था।

🤯 अत्यधिक ड्यूटी और तनाव बना वजह, अन्य पहलुओं की भी गहन जांच जारी

आईजी के आधिकारिक बयान के अनुसार, गिरफ्तार चालक ने स्वीकार किया कि वह लंबे समय से अत्यधिक ड्यूटी अवधि (ओवरटाइम) और उच्चाधिकारी की डांट-फटकार के कारण मानसिक तनाव से गुजर रहा था।

इसी आक्रोश में आकर उसने इस आपराधिक घटना को अंजाम दिया। हालांकि, पुलिस प्रशासन इस हत्याकांड के अन्य संभावित कोणों की भी गहराई से तहकीकात कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसके पीछे कोई और बड़ी वजह या बाहरी षड्यंत्र तो शामिल नहीं है।

🔫 भागलपुर के सुल्तानगंज में दफ्तर के अंदर गोलियों से भून दिए गए थे ईओ कृष्ण भूषण प्रसाद

औरंगाबाद की इस बीभत्स घटना ने कुछ ही महीने पूर्व भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में हुई नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी कृष्ण भूषण प्रसाद की दुस्साहसिक हत्या की यादें ताजा कर दी हैं।

उस प्रकरण में हथियारबंद अपराधी बेखौफ होकर नगर परिषद कार्यालय के भीतर दाखिल हुए थे और मुख्य पार्षद के चेंबर में ही अधिकारी कृष्ण भूषण प्रसाद पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी थीं। अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही उन्होंने दम तोड़ दिया था। यद्यपि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रामधनी यादव को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था, किंतु इस घटना ने सरकारी कार्यालयों की लचर सुरक्षा व्यवस्था को उजागर कर दिया था।

📈 टेंडर, निर्माण कार्यों और राजनीतिक-आपराधिक दबाव के बीच पिस रहे अधिकारी

राज्य के विभिन्न नगर निकायों में विकास योजनाओं, करोड़ों रुपये के निर्माण निविदाओं (टेंडरों), ठेकों और राजनीतिक-आपराधिक सिंडिकेट का भारी दबाव कार्यपालक अधिकारियों पर निरंतर बना रहता है।

ईमानदारी और निष्पक्षता से दायित्व निभाने वाले अधिकारियों को कई स्तरों पर धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ता है। लगातार दो शीर्ष अधिकारियों की असमय हत्या के उपरांत बिहार में अधिकारियों की सुरक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। अधिकारी संघों ने सरकार से सुरक्षा कवच बढ़ाने की गुहार लगाई है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी है।

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