खैरागढ़ में पोस्ट ऑफिस में रेलवे रिजर्वेशन काउंटर बंद, देश-विदेश के विद्यार्थियों पर सीधा असर

खैरागढ़: इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के छात्रों और स्थानीय नागरिकों की वर्षों पुरानी सुविधा पर अचानक विराम लग गया है. खैरागढ़ पोस्ट ऑफिस में संचालित रेलवे आरक्षण काउंटर अतिरिक्त IPPRS केंद्र को बंद कर दिया गया है. डाक विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर के आदेश पर ये फैसला लिया गया है. इस फैसले ने यूनिवर्सिटी में देश-विदेश के विद्यार्थियों के साथ साथ आम यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी छात्र कला और संगीत की शिक्षा ग्रहण करने आते हैं. आवागमन के लिए इन विद्यार्थियों का प्रमुख साधन रेल है. लेकिन विडंबना है कि खैरागढ़ में आज तक रेलवे स्टेशन नहीं है. ऐसे में रेलवे टिकट बुकिंग के लिए विद्यार्थियों और नागरिकों को राजनांदगांव रेलवे स्टेशन तक जाना पड़ता है. जो समय और खर्च दोनों की दृष्टि से परेशानी भरा होता है.
राहत देने वाली व्यवस्था पर ताला: इन सभी समस्याओं को देखते हुए पहले खैरागढ़ पोस्ट ऑफिस में रेलवे रिजर्वेशन काउंटर शुरू किया गया था यह काउंटर छात्रों और नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ. लंबी दूरी की यात्रा. परीक्षा कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने के लिए टिकट बुकिंग स्थानीय स्तर पर ही हो जाती थी, लेकिन अब बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इस काउंटर को बंद कर दिया गया है. काउंटर बंद होने की सूचना केवल एक नोटिस के जरिए चस्पा कर दिया गया है.
छात्रों और आमजन में रोष: इस फैसले से लोगों में नाराजगी और असमंजस का माहौल है. न तो डाक विभाग ने कोई स्पष्ट कारण सार्वजनिक किया और न ही भविष्य की कोई योजना बताई. रेलवे टिकट काउंटर बंद होने से सबसे अधिक प्रभावित विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हो रहे हैं. परीक्षा छुट्टियों और कार्यक्रमों के दौरान उन्हें फिर से राजनांदगांव के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. वहीं बुजुर्ग महिलाएं और कामकाजी लोग भी इस फैसले से परेशान हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्णय खैरागढ़ जैसे शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र के साथ अन्याय है.
सांसद संतोष पांडे से आग्रह है कि वे इस गंभीर विषय को संज्ञान में लें. रेल मंत्रालय से चर्चा कर खैरागढ़ पोस्ट ऑफिस में रेलवे रिजर्वेशन काउंटर को फिर से शुरू करने की पहल की जाए– पूर्व सांसद प्रतिनिधि कपिनाथ महोबिया

देश विदेश के विद्यार्थी जिस विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे हों वहां न्यूनतम यात्री सुविधाएं भी छीनी जाएं तो क्षेत्र के विकास पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. अब देखना यह होगा कि जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से छात्रों और नागरिकों की यह अहम सुविधा कब तक बहाल होती है.






