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जब महादेव को बनना पड़ा हाथी: जानें क्यों शनि की टेढ़ी नजर से बचने के लिए शिव ने लिया था पशु अवतार?

ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता कहा गया है. कहा जाता है कि जिस पर शनि देव प्रसन्न हो जाते हैं, तो वो रंक से राजा बन जाता है. वहीं जिस पर शनि देव क्रोधित हो जाएं और उनकी वक्री दृष्टि डाल डें तो उसका जीवन बर्बाद हो जाता है. शनि देव की वक्री दृष्टि बहुत घातक मानी जाती है.

माना जाता है कि जिस पर शनि देव की वक्री दृष्टि पड़ती है उसके जीवन में बहुत सी परेशानियां आ जाती हैं. मानव तो क्या देवता भी शनि देव की वक्री दृष्टि से नहीं बच पाएं हैं. बताया जाता है कि शनि देव ने भगवान शिव के ऊपर वक्री दृष्टि डाली थी, जिसके कारण भगवान शिव को कैलाश पर्वत तक छोड़ना पड़ा था. आइए इस पूरी कथा को विस्तार से जानते हैं.

पौराणिक कथा के अनुसार…

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार शनि देव कैलाश पर्वत पहुंचे. उन्होंने अपने गुरु भगवान शिव को प्रणाम किया. फिर उन्होंने भगवान शिव से आग्रह किया कि कल मैं आपकी राशि में प्रवेश करूंगा. ऐसे में मेरी वक्री दृष्टि आप पर होगी. आप कृपया इसके लिए तैयार हो जाएं. फिर क्या था शिव जी शनि देव की वक्री दृष्टि से बचने के लिए कैलाश छोड़कर धरती पर जा पहुंचे और एक हाथी का रूप धारण कर लिया.

थोड़ा समय बीतने के बाद भगवान शिव ने सोचा की शनि देव की वक्री दृष्टि का समय अब निकल चुका है. शनि देव उनकी राशि से भी चले गए होंगे. अब कैलाश लौट जाना चाहिए. इसके बाद भगवान शिव कैलाश पर्वत लौट आए. कैलाश पर्वत पर उन्होंने शनि देव को अपनी प्रतिक्षा करते हुए देखा. इस चीज से भगवान शिव बहुत ही प्रसन्न हुए और कहा कि शनि देव आपकी दृष्टि का तो मुझ पर कोई असर नहीं हुआ.

शनि देव पर भगवान शिव हुए प्रसन्न

भगवान शिव ने शनि देव से कहा कि मुझ पर वक्री दृष्टि डालने का भी समय बीत चुका है. इस पर शनि देव ने शिव जी को प्रणाम किया और कहा कि मेरी वक्री दृष्टि से कोई नहीं बच सकता. यह मेरी वक्री दृष्टि का ही प्रभाव था कि आप सवा प्रहर के लिए देव योनि से पशु योनि में चले गए. मेरी वक्री दृष्टि आप पर पड़ गई. शनि देव की यह बात सुनकर भगवान शिव अति प्रसन्न हुए और अपने शिष्य को हृदय से लगा लिया.

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