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मध्यप्रदेश

अंबेडकर की तस्वीर जलाने के मामले में जमानत खारिज, वकील बोले-किसी व्यक्ति का पुतला जलाना अपराध नहीं

ग्वालियर: डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा समेत चार लोगों को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. जिला एवं सत्र न्यायालय में शुक्रवार को करीब 3 घंटे तक चली सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी है. अब शनिवार सुबह 11 बजे हाईकोर्ट में स्पेशल बेंच इस केस में जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी.

अनिल मिश्रा सहित सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

ग्वालियर में गुरुवार को भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने का एक वीडियो सामने आया था. इस मामले में पुलिस ने 7 लोगों को आरोपी बनाया गया है, इसमें ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा समेत 4 आरोपियों को पुलिस ने गुरुवार रात गिरफ्तार किया था. इसके बाद से ही पुलिस, वकील और दलित संगठनों में तनाव की स्थिति बनी हुई है.

आरोपियों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

शुक्रवार दोपहर पुलिस ने अनिल मिश्रा सहित गिरफ्तार सभी आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया, लेकिन 3 घंटे तक चली सुनवाई के बाद भी ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा और उनके साथ गिरफ्तार हुए तीनों आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी है.

शनिवार सुबह हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और आरोपियों की पैरवी कर रहे एडवोकेट पवन पाठक ने बताया, “असल में एससी-एसटी एक्ट में मजिस्ट्रेट को सुनवाई का प्रावधान नहीं है. इसके लिए स्पेशल कोर्ट रहती है. इस केस में उनके लिए कुछ भी नहीं है. अनिल मिश्रा और तीनों आरोपियों को गलत तरीके से डिटेन किया गया है. अब शनिवार को ग्वालियर हाईकोर्ट में स्पेशल बेंच गठित की गई है. जिसमें शनिवार सुबह 11 बजे आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी.”

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

एडवोकेट पवन पाठक ने बताया, ” पुलिस ने इस केस में अनिल मिश्रा और अन्य लोगों को मनमाने तरीके से गिरफ्तार किया है, उन्हें 7 बजे गिरफ्तार किया गया और उसके बाद FIR लिखी गई है. ऐसे में प्रथम दृष्टया ये प्रमाणित होता है कि इन लोगों को अवैध तरीके से डिटेन किया गया. पूरी कार्रवाई दबाव में की गई है. इस मामले में अब उच्च न्यायालय शनिवार को सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुनाएगा, तब तक याचिकाकर्ताओं (एड. अनिल मिश्रा और अन्य) को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.”

किसी व्यक्ति का पुतला जलाना अपराध नहीं

पवन पाठक ने आगे कहा, ” जिला न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने अपना पक्ष रखा है. न्यायालय के सामने भी यह बात रखी है कि जो मुकदमा लगाया गया है उसमें अनिल मिश्रा और अन्य गिरफ्तार लोगों का कोई रोल नहीं है. जिन धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया है उसमें किसी भी व्यक्ति का पुतला जलाना अपराध नहीं है. अगर भगवान के नाम के नारे लगाना अपराध है तो देश में सरकारे पलट जाएंगी.”

डॉक्टर अंबेडकर के नाम पर मुर्दाबाद के नारे लगाने के सवाल उन्होंने कहा कि “अंबेडकर एक राजनीतिक व्यक्ति हैं और जो लोग उनके नाम पर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनमें से सिर्फ 10-15 प्रतिशत उनके समर्थक हैं जो इस तरह द्वेष फैलाना चाहते हैं. हमारी बात को विवादित करना चाहते हैं. ये लोग पहचान भी नहीं कर पाएंगे की नारे किसने लगाए, लेकिन जय श्रीराम के नारे लगाए हैं और वह आगे भी लगते रहेंगे.”

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