मौत के बाद भी सरपंच बने रहेंगे देवल गांव के लाखन सिंह, जनता ने दी अनोखी श्रद्धांजलि

सागर : बीना की देवल ग्राम पंचायत में चार महीने पहले सरपंच की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद ग्रामीणों ने उप चुनाव में उनकी पत्नी को सरपंच का चुनाव भारी मतों से जिताकर सरपंच को अनोखी श्रद्धांजलि दी. जीत के बाद गांव के लोगों ने जश्न में ढोल नगाड़े नहीं पीटे, बल्कि शांति के साथ सरपंच के घर पहुंचकर दिवंगत पति को श्रद्धांजलि दी. ऐसा ही एक मामला खुरई जनपद पंचायत की प्यासी ग्राम पंचायत से सामने आया है जहां सरपंच के निधन के बाद उनके बेटे ने भारी बहुमत से जीत हासिल की.
यहां पति की मृत्यु के बाद पत्नी, वहां पिता की मृत्यु के बाद बेटा उतरा चुनाव में
29 दिसंबर को बीना की देवल ग्राम पंचायत और खुरई की प्यासी ग्राम पंचायत में त्रि-स्तरीय पंचायत उप निर्वाचन हुआ था. शुक्रवार को दोनों ही पंचायतों के नतीजे घोषित हुए. बीना तहसीलदार अंबर पंथी ने बताया, ” देवल ग्राम पंचायत में मृतक व पूर्व सरपंच लाखन सिंह यादव की पत्नी वर्षा यादव को 667 व प्रतिद्वंदी लखनलाल तिवारी को 257 वोट प्राप्त हुए हैं.” वहीं खुरई तहसीलदार डॉ. राकेश कुमार ने बताया, ” प्यासी ग्राम पंचायत में सरपंच के निधन के बाद उपचुनाव हुआ था, जिसमें सरपंच के बेटे सत्यम कुर्मी को 549 वोट और एक अन्य प्रत्याशी ब्रजमोहन कुर्मी को 253 वोट मिले हैं, वहीं नोटा को 12 मत मिले हैं.”
जश्न नहीं, श्रद्धांजलि देने पहुंचे ग्रामीण
बीना जनपद पंचायत की देवल ग्राम पंचायत में हुए उपचुनाव के बाद जैसे ही नतीजा आया तो हर किसी के चेहरे पर खुशी की जगह संतुष्टि की भाव नजर आया, जैसे हर कोई स्व. लाखन सिंह यादव की पत्नी वर्षा यादव के पक्ष में फैसला चाह रहा हो. वजह थी कि सरपंच लाखन सिंह यादव जब 4 सितंबर 2025 को बाइक से बीना से अपने गांव लौट रहे थे तभी दो लोगों ने मिलकर उनके वाहन को कुचलकर उनकी हत्या कर दी थी. इस मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जो जेल में हैं.
इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था. परिजनों और ग्रामीणों की मांग पर मृतक सरपंच लाखन सिंह यादव की पत्नी को मैदान में उतारा गया और चुनाव में उनकी ऐतिहासिक विजयी भी हुई. जीत के बाद ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि कोई जश्न नहीं मनाया जाएगा. गांव के सभी लोग मृतक सरपंच लाखन सिंह यादव के घर पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी.






