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झारखण्ड

रांची में नरेगा दिवस के दिन मजदूरों का होगा जुटान, वीबी जी राम जी कानून के खिलाफ उलगुलान, झारखंड नरेगा वॉच का आह्वान

रांची: केंद्र सरकार द्वारा 2005 के मनरेगा कानून को संशोधित कर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी जी राम जी कानून 2025, को 18 दिसंबर 2025 को पारित किया. इसको लेकर बहस छिड़ी हुई है – एक पक्ष तारीफ कर रहा है तो दूसरा सवाल उठा रहा है. मजदूरों के हित में काम करने वाली संस्था झारखंड नरेगा वॉच ने प्रेस कांफ्रेस कर इस नए कानून का विरोध किया है. साथ ही, इस संस्था नें 2 फरवरी को नरेगा दिवस के अवसर पर रांची में करीब 5 हजार मजदूरों के जुटान की घोषणा की है.

संस्था ने मनरेगा और वीबी जी राम जी कानून का तुलनात्मक अध्ययन कर बताया है कि कैसे यह कानून मजदूर हित के खिलाफ है. इसे देश के 26 करोड़ मजदूरों को सीधे प्रभावित करने वाला बताया गया है. दावा किया गया है कि नए कानून से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, ग्रामीण संरचना और स्थानीय निकाय प्रभावित होंगे.

मजदूर हित में नहीं है वीबी जी राम जी कानून-नरेगा वॉच

संस्था के संयोजक जेम्स हेरेंज के मुताबिक श्रम बजट के स्थान पर नॉर्मेटिव एलोकेशन, मजदूरी दर का केंद्रीकरण और 60 दिनों का अनिवार्य कार्यस्थगन झारखंड जैसे राज्यों के लिए चिंता का विषय है. इससे भूमिहीन मजदूरों पर संकट बढ़ने, पलायन और भुखमरी का खतरा बढ़ने की संभावना जतायी गई है. साथ ही बायोमेट्रिक अटेंडेंस और 40 प्रतिशत वित्तीय भार की वजह से झारखंड जैसे राज्य पर करीब 2000 करोड़ का वित्तीय बोझ बढ़ेगा. लिहाजा, 2 फरवरी को नरेगा दिवस के दिन वीबी जी राम जी कानून हटाओ के अभियान के साथ रैली निकालने की घोषणा की गई है.

“बजट सत्र में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजे हेमंत सरकार”

झारखंड नरेगा वॉच ने अगले पांच माह में अभियान चलाकर 1 लाख मजदूरों को 100 दिन का रोजगार दिलाएगी. साथ ही 2000 ग्राम सभाओं से वीबी जी राम जी के खिलाफ प्रस्ताव पारित कराकर झारखंड सरकार और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. संस्था ने आगामी बजट सत्र में वीबी जी राम जी कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को प्रेषित करने की मांग की है. इसके अलावा राजनीतिक दलों, जनसंगठनों, किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों के साथ बैठकें कर मनरेगा बचाओ आंदोलन को तेज किया जाएगा.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज और बलराम ने बताया कि कैसे मनरेगा की तुलना में वीबी जी राम जी कानून मजदूरों के खिलाफ है. दोनों कानून के स्वरूप, काम का अधिकार, वित्त पोषक का तरीका, लागत साझाकरण, कार्य योजनाओं, काम की उपलब्धता, निगरानी और जवाबदेही, गारंटीकृत कार्य दिवस और परिवार की परिभाषा में अंतर बताया गया.

मनरेगा और वीबी जी राम जी कानून में अंतर

  1. नरेगा वॉक की ओर से बताया गया है कि मनरेगा कानून की वजह से सरकार काम देने के लिए बाध्य थी, लेकिन वीबी जी राम जी कानून के तहत निर्धारित बजट के आधार पर काम उपलब्ध कराया जाएगा.
  2. मनरेगा सिर्फ जम्मू कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लागू थी,लेकिन नया कानून उन्हीं ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा जिनको केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी.
  3. मनरेगा में केंद्र सरकार अकुशल श्रम मजदूरी का 100 प्रतिशत वहन करती थी, लेकिन नए कानून के तहत केंद्र सरकार राज्यों के लिए एक मानक आवंटन तय करेगी. इससे अधिक खर्च होने पर राज्य सरकारों को वहन करना पड़ेगा.
  4. मनरेगा में केंद्र 100 प्रतिशत श्रम लागत और 75 प्रतिशत सामग्री लागत वहन करती है, लेकिन जी राम जी की वजह से राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा. ज्यादातर राज्यों में केंद्र 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत वहन करेगी.
  5. मनरेगा में ग्राम सभाएं स्थानीय जरूरतों के आधार पर योजनाओं का निर्धारण करती थीं. अब विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर से निर्देशित होंगी. इससे ग्राम सभा और पंचायत की भूमिका कम हो जाएगी.
  6. मनरेगा में साल में किसी भी समय काम मांगने का अधिकार था, लेकिन नए कानून के तहत फसलों की बुआई और कटाई के समय 60 दिन तक काम नहीं मिलेगा.
  7. मनरेगा के तहत प्रति परिवार 100 दिन का काम मांगने का अधिकार था, लेकिन नए कानून के तहत प्रति परिवार प्रतिवर्ष 125 दिन का काम मिलेगा.
  8. मनरेगा में पति-पत्नी और 18 साल के बच्चे परिवार कहे जाते हैं. साथ ही एकल महिला, विधवा और दिव्यांगों के लिए अलग से जॉब कार्ड बनता है, लेकिन वीबी जी राम जी के तहत परिवार का मतलब है जो एक साथ खाना खाते हों या एक राशन कार्ड में जिनके नाम हों.

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