कोरोना का मरीज मिलने पर नहीं होगा ऑफिस सील, अधिकारियों ने भ्रम किया दूर

कोरोना वायरस आज पूरा दुनिया को लेकर चिंता का विषय बन गया है। भारत में भी यह पैर पसार चुका है। इस महामारी के साथ साथ कई तरह के भ्रम भी तेजी से फैल रहे हैं। सरकार ने उन रिपोर्टों को गलत बताया है, जिनमें कहा गया कि अगर किसी कार्यालय के कर्मचारी को कोरोना वायरस होता है तो उस इकाई को सील कर दिया जाएगा और उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सजा दी जाएगी।
इकनोमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक कोरोना केस मिलने पर पूरी ऑफिस बिल्डिंग को सील नहीं किया जाएगा या उसे कंटेनमेंट जोन घोषित नहीं किया जाएगा। इसके बजाय कोरोना पॉजिटिव पाए गए शख्स के संपर्क में आए लोगों को क्वॉरंटीन किया जाएगा। एक अधिकारी ने साफ करते हुए कहा कि बिल्डिंग को तीन महीने के लिए सील करने का कोई योजना नहीं है।
बता दें कि गृह सचिव अजय भल्ला ने सलाह दी थी कि होम मिनिस्ट्री की ओर से जारी गाइडलाइंस ‘का सहारा लेकर किसी मैन्युफैक्चरिंग या कमर्शल एस्टैब्लिशमेंट के मैनेजमेंट को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में कोविड 19 पर बनी टेक्निकल कमिटी ने सुझाव दिया है कि इन्फेक्टेड वर्कप्लेस को लंबे समय तक सील करने के बजाय उसे सैनिटाइज किया जा सकता है और 12 घंटे बाद उसका उपयोग शुरू किया जा सकता है
ऑफिस जाने वालों के लिए गृह मंत्रालय के निर्देश
Employee के लिए ऑफिस की तरफ से स्पेशल ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सभी गाड़ियों और मशीनों को ऑफिस में घुसने से पहले डिस्इंफेक्टेंट से साफ करना होगा।
ऑफिस में आने वाले और बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति की थर्मल स्क्रीनिंग करना जरूरी।
ऑफिस में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का मेडिकल इंश्योरेंस किया जाएगा।
Entry और Exit गेट पर टच फ्री मैकेनिज्म को लागू किया जाएगा।
Entry और Exit गेट के साथ-साथ कॉमन एरिया में भी हैंडवॉश और सैनिटाइजर रखे जाएंगे। ऑफिसों में शिफ्ट के बीच में 1 घंटे का अंतराल होना जरूरी होगा।
ऑफिस की किसी भी मीटिंग में 10 से अधिक लोग शामिल नहीं होंगे।
मीटिंग व ट्रेनिंग सेशन के दौरान कर्मचारियों को 6 फीट की दूरी पर बैठना होगा।
ऑफिस में सभी कर्मचारी सोशल डिस्टेंसिंग को ही अपनाएंगे।