Ranchi Protest: ‘अमेरिका की तानाशाही नहीं चलेगी’, वेनेजुएला के समर्थन में झामुमो और कांग्रेस ने किया शक्ति प्रदर्शन

रांची: राजधानी रांची में महागठबंधन पार्टियों, जनवादी संस्थाओं और मजदूर यूनियनों ने वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई और गाजा में इजराइल की कार्रवाई के खिलाफ विरोध मार्च निकाला. यह मार्च रांची के सैनिक मार्केट से शुरू हुआ और परमवीर अल्बर्ट एक्का चौक और शहीद चौक से होते हुए लोक भवन पहुंचा. जाकिर हुसैन पार्क के पास पुलिस ने पोस्टर और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद यह मार्च एक जनसभा में बदल गया.
इस विरोध मार्च में झारखंड मुक्ति मोर्चा, वामपंथी पार्टियों के साथ-साथ राजद, कांग्रेस, सपा और आप के नेता शामिल रहे. लोक भवन मार्च में शामिल पार्टियों के नेताओं ने अमेरिकी साम्राज्यवाद का विरोध किया. उन्होंने मांग की कि भारत सरकार वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की रिहाई सुनिश्चित करने, वेनेजुएला की संप्रभुता बनाए रखने और अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ जनमत बनाने में सक्रिय रूप से भाग ले. अमेरिका विरोधी पोस्टर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस पूरे मामले पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की चुप्पी निंदनीय है.
लोक भवन मार्च में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह विरोध अमेरिकी तानाशाही और छोटे देशों की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों के खिलाफ उसकी कार्रवाई के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक की सभी पार्टियों द्वारा चिंता जताए जाने के बावजूद वेनेजुएला और गाजा के मुद्दों पर मोदी सरकार की चुप्पी दुखद है. सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह विरोध वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयास के खिलाफ है.
माले के नेता शिवेंदु ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई कार्रवाई पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के कगार पर धकेल रही है. उन्होंने कहा कि विश्व शांति और वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र खतरे में है. इसलिए, देश की सभी वामपंथी पार्टियां मांग करती हैं कि किसी को भी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के साथ छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए, और न ही किसी बड़ी शक्ति को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने की अनुमति दी जानी चाहिए. वामपंथी नेता ने कहा कि आज हम राज्यपाल के माध्यम से भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपेंगे, जिसमें उनसे इन अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भारत सरकार को स्पष्ट रुख अपनाने का निर्देश देने की मांग की जाएगी.






