झांसी की रानी बनी बिटिया! बस कंडक्टर ने की बदतमीजी तो सीधे ले गई थाना, अब गाड़ी जब्त और आरोपी फरार

गिरिडीहः जिस बस में छात्र-छात्राओं, वृद्ध को मुफ्त में सेवा देना है उसी बस में चल रही छात्राएं दुर्व्यवहार का शिकार हो गई. छात्राओं से न सिर्फ किराया मांगा गया बल्कि इनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया.
हालांकि छात्राओं ने न सिर्फ इस बात का विरोध किया बल्कि बदतमीजी कर रहे बस के कंडक्टर का वीडियो भी बनाते हुए सोशल मीडिया पर डाल दिया. फिर क्या था मामला मंत्री दीपक बिरुआ तक पहुंचा. मंत्री ने मामले में संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी को कार्रवाई का निर्देश दिया. फिर क्या था डीसी रामनिवास यादव ने बस को जब्त करने को कहा. तिसरी थाना पुलिस ने भी बस को पकड़ लिया और कंडक्टर की खोज शुरू कर दी.
तुरंत जब्त हुई बस
इधर मंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारी राम निवास यादव ने कार्रवाई का निर्देश जिला परिवहन पदाधिकारी और संबंधित थाना को दिया जिसके बाद बस को जब्त कर लिया गया. सोशल मीडिया पर मंत्री के पोस्ट और रिप्लाई करते हुए जिलाधिकारी रामनिवास यादव ने कहा कि उक्त मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए परिवहन विभाग द्वारा बस को सीज कर दिया गया है. साथ ही बस ऑनर से स्पष्टीकरण की मांग भी की गई है. वर्तमान में बस तीसरी थाना में सीज किया गया है.
इधर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस मामले के सख्त कार्रवाई की मांग की है. परिषद के उज्ज्वल तिवारी ने वीडियो बयान जारी कर बस मालिक और कंडक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
बस को तिसरी थाना की पुलिस ने जब्त कर लिया है. जबकि बस के संचालक को शो कॉज किया गया है. वहीं छात्राओं से लिखित शिकायत देने को कहा गया है. दूसरी तरफ उक्त बस का मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना परमिट रद्द करने के लिए आगे लिखा जा रहा है. -संतोष कुमार, डीटीओ, गिरिडीह.
क्या है पूरी योजना
दरअसल, झारखंड मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना का उद्देश्य सुदूर एवं परिचालन रहित/सहित क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद स्थानीय ग्रामिणों को वाहन की सुलब्धता कराना. छात्र-छात्राओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, राज्य सरकार के पेंशन से आच्छादित विधवा, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त झारखंड आंदोलनकारियों को बस भाड़ा में शत प्रतिशत रियायत तथा निजी बस संचालकों को प्रोत्सहित करना है. योजना के तहत छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक संस्थानों, बीमार एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को हॉस्पिटल अथवा सरकारी कार्यालय तक, किसानों के उपज को मुख्यालय स्थित बाजारों तक पहुंचने की सुविधा विस्तार देना है.






