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छत्तीसगढ़

धान खरीदी केंद्र में पूर्व विधायक का डेरा: सिस्टम पर उठाए सवाल, वर्तमान विधायक ने कसा तंज- “अब पता चली किसानों की मुश्किल?”

बालोद : कहते हैं राजनीति में कौन कब करवट बदले ये कोई नहीं जानता. बालोद जिले के एक धान खरीदी केंद्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई,जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है. जिस विधानसभा क्षेत्र पर कभी कुमारी बाई साहू और उनके पति स्वर्गीय मदन लाल साहू का दबदबा हुआ करता था, आज उसी क्षेत्र की मंडी में पूर्व विधायक को एक अदद ‘टोकन’ के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा. 278 क्विंटल धान बेचने की जद्दोजहद में पूर्व विधायक अपने बेटे के साथ देर रात तक केंद्र में बैठी रहीं.

कलेक्टर से आस, व्यवस्था से निराशा

वरिष्ठ बीजेपी नेता कुमारी बाई साहू के बेटे नरेश मदन साहू, जो खुद जनपद पंचायत गुरूर में कृषि विभाग के सभापति हैं, उनकी बेचैनी साफ झलक रही थी. उन्होंने बताया कि अब तक उनका टोकन नहीं कट सका है.इतना सारा धान (278 क्विंटल) हम कहां ले जाएंगे?. थोड़ा बहुत होता तो छोड़ भी देते, लेकिन अब केवल कलेक्टर ही हमारा धान खरीद सकते हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक समाधान नहीं होगा, वे वहां से नहीं उठेंगे.

‘जब हम लड़ रहे थे, तब कहां थे भाजपाई?’

इस पूरे मामले में सियासत की एंट्री तब हुई जब संजारी बालोद की वर्तमान कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने मोर्चा संभाला.उन्होंने पूर्व विधायक की इस स्थिति पर सहानुभूति जताने के बजाय तीखा हमला बोला.

“जब हम किसानों के हक के लिए सड़कों पर लाठियां खा रहे थे और संघर्ष कर रहे थे, तब भाजपा का एक भी नेता नजर नहीं आया. आज जब खुद का धान फंस गया है, तो ये सहानुभूति बटोरने के लिए केंद्र में जाकर बैठ गए हैं.आज आखिरी दिन बीजेपी के लोग सिर्फ दिखावा कर रहे हैं “- संगीता सिन्हा,कांग्रेस विधायक

आम किसान के धान का होगा क्या ?

जिले में धान खरीदी को लेकर पहले ही घमासान मचा हुआ है. ‘रकबा समर्पण’ और तकनीकी खामियों के कारण सैकड़ों किसान अपनी उपज नहीं बेच पाए हैं. कांग्रेस विधायक ने सवाल उठाया कि आखिर इन सब चीजों का जिम्मेदार कौन है?. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि एक पूर्व विधायक और सत्ता पक्ष के जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को मंडी में रात गुजारनी पड़ रही है, तो आम किसान की सुनवाई किस स्तर पर हो रही होगी?.

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