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मध्यप्रदेश

ड्रग्स समझकर जिसे पकड़ा, वो निकला खेतों का यूरिया! इंदौर पुलिस की ‘हाई-प्रोफाइल’ कार्रवाई की निकली हवा

इंदौर : मध्य प्रदेश के इंदौर से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां तेजाजी नगर पुलिस ने पिछले दिनों एमडी ड्रग्स के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था लेकिन जब एमडी की जांच करवाई गई तो वह यूरिया निकला. एमडी ड्रग्स की जगह यूरिया निकलते ही पुलिस के होश उड़ गए, जिसके बाद इस पूरे मामले में पुलिस ने एफआईआर रद्द करने हाईकोर्ट की इंदौर बैंच में याचिका लगाई. हाई कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने के आदेश तो दे दिए हैं लेकिन अब इंदौर पुलिस की कार्य प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं.

1 करोड़ की ड्रग्स निकली फर्जी

इंदौर की तेजाजी नगर पुलिस ने पिछले दिनों एमडी ड्रग्स के मामले में तीन आरोपियों के साथ आजाद नगर थाने के आरक्षक को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने अनुमान लगाया था कि आरोपियों के पास तकरीबन 1 करोड़ रुपए की एम डी ड्रग्स बरामद की गई है. लेकिन जब पुलिस कथित ड्रग्स की जांच करवाई गई तो वह यूरिया निकला. सबसे पहले कथित ड्रग्स की जांच को लेकर हैदराबाद स्थित लैब भेजा गया, जहां से यूरिया होने की पुष्टि हुई. इसके बाद पुलिस ने एक और जांच भोपाल स्थित लैब से भी करवाई लेकिन यहां भी यूरिया और अन्य केमिकल के होने की पुष्टि हुई.

आरोपी रिहा, पुलिस कटघरे में

इसके चलते पुलिस ने इस पूरे ही मामले में आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में आवेदन लगाया था. वहीं इस मामले में एडवोकेट नितिन पाराशर ने बताया, ” जिन आरोपियों के खिलाफ एमडी ड्रग्स मामले में प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उनपर दर्ज एफआईआर को रद्द कर रिहा कर दिया गया है. एडवोकेट ने कहा कि तात्कालिक थाना प्रभारी और ट्रेनिंग पर आए हुए आईपीएस अधिकारी के रिकॉर्ड को मजबूत दिखाने के लिए है यह पूरा फर्जी मामला तैयार किया गया था. इस मामले में पुलिस कमिश्नर ने पुलिस अधिकारियों को पुरस्कृत भी कर दिया था.”

एडवोकेट ने आगे कहा, ” अब एफएसएल लैब की रिपोर्ट के आधार पर पूरा मामला उल्टा पड़ गया है और सभी चारों आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है. अब उनके पक्षकार इस पूरे मामले में मानहानि का दावा प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं.” वहीं, इस मामले पर डीसीपी कृष्णलाल चंदानी ने कहा, ” तेजाजी नगर थाने में ड्रग्स का मामला दर्ज किया गया था लेकिन जब भोपाल एफएसल व हैदराबाद एफएसल में जांच हुई तो उसमें पोटेशियम नाइट्रेट पाया गया. केस रद्द कर आरोपियों को रिहा कर दिया गया है.”

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