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Digital Arrest Scam: डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर लगेगा परमानेंट ‘लगाम’! WhatsApp के लिए SIM-Binding की तैयारी, केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा

देशभर में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट स्कैम मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी है. केंद्र सरकार ने WhatsApp जैसे OTT कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के लिए SIM-बाइंडिंग को एक प्रभावी उपाय बताया है. यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत दूरसंचार विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई अपनी स्टेटस रिपोर्ट में दी.

यह रिपोर्ट अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरू किए गए स्वप्रेरणा (Self-Induction) मामले के तहत दाखिल की गई है. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया गया कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी गठित की है.

केंद्र सरकार के अनुसार, कमेटी की अब तक दो बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें SIM जारी करने और उसके मैनेजमेंट से जुड़ी कमजोरियों पर फोकस किया गया, जिनका फायदा स्कैमर्स उठा रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम में OTT प्लेटफॉर्म, खासकर WhatsApp, के दुरुपयोग को एक बड़ा कारण माना गया है और SIM-बाइंडिंग के जरिए इस पर काबू पाया जा सकता है.

अब बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की अनुमति

इस मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट एन.एस. नप्पिनई ने कमेटी की बैठकों में हिस्सा लिया और जोर दिया कि ऐसे उपायों का मूल्यांकन जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और धोखाधड़ी से निरंतर सुरक्षा के आधार पर होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि समाधान में मौजूदा और नए, दोनों तरह के SIM जारी करने के मामलों को शामिल किया जाना चाहिए.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत अब बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की अनुमति दी गई है. DoT के मुताबिक, इससे जुड़े नियम अंतिम चरण में हैं और पब्लिक कंसल्टेशन पूरा हो चुका है. स्पूफ्ड कॉल्स पर कार्रवाई का जिक्र करते हुए DoT ने बताया कि अक्टूबर 2024 में शुरू किए गए सेंट्रल इंटरनेशनल आउट रोमर (CIOR) सिस्टम के जरिए विदेशी स्थानों से आने वाली लेकिन भारतीय नंबर दिखाने वाली कॉल्स को ब्लॉक किया गया. अकेले अक्टूबर 2024 में करीब 1.35 करोड़ कॉल्स रोकी गईं, जिसके बाद ऐसी कॉल्स की संख्या घटकर लगभग 1.5 लाख रह गई है.

VoIP कॉल्स को लेकर कमेटी को क्या बताया

SIM जारी करने की सीमा को लेकर DoT ने बताया कि एक टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर (TSP) एक दिन में अधिकतम तीन SIM जारी कर सकता है- एक eKYC और दो D-KYC के जरिए. हालांकि, यह भी स्वीकार किया गया कि फिलहाल अलग-अलग TSP के बीच क्रॉस-वेरिफिकेशन की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है.

VoIP कॉल्स को लेकर कमेटी को बताया गया कि WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म से होने वाली कॉल्स आईटी एक्ट, 2000 के तहत आती हैं और DoT के सीधे दायरे से बाहर हैं. इस पर नप्पिनई ने आपत्ति जताते हुए कहा कि टेलीकॉम कंपनियां भी VoIP सेवाएं देती हैं और उनके दुरुपयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला तब सामने आया जब एक सीनियर सिटिजन दंपति ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर बताया कि स्कैमर्स ने खुद को CBI, इंटेलिजेंस ब्यूरो और न्यायपालिका के अधिकारी बताकर उनसे ₹1.5 करोड़ की ठगी की. कोर्ट को यह भी बताया गया कि CBI ने अब तक डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े मामलों में ₹10 करोड़ की राशि की पहचान की है.

बैंकों द्वारा ऐसे फ्रॉड ट्रांजैक्शन का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल और डिजिटल अरेस्ट मामलों से निपटने के लिए MoU और SOP तैयार किए जाने की जानकारी भी कोर्ट को दी गई. इन सबको देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को इन उपायों को तेज़ी से लागू करने के निर्देश दिए हैं.

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