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मध्यप्रदेश

इंदौर के MY अस्पताल का बुरा हाल! मरीजों की OPD में बिल्ली ने दिया 3 बच्चों को जन्म, डीन का जवाब सुन रह जाएंगे हैरान

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एम वाय अस्पताल एक बार फिर गंभीर लापरवाही को लेकर सुर्खियों में है. छह महीने पहले इसी अस्पताल में चूहों के कुतरने से दो नवजातों की मौत हो गई थी, जिसने प्रदेशभर में अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए थे. अब अस्पताल के ओपीडी में बिल्ली के बच्चों के जन्म लेने की घटना ने मरीजों की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर फिर से गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं.

अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म दिया. बिल्ले के बच्चे ओपीडी परिसर में घूमते दिखे, जिसका वीडियो भी सामने आया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि बिल्लियों की मौजूदगी केवल सामान्य क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एचआईवी संक्रमित मरीजों के संवेदनशील वार्ड और मेडिसिन स्टोर तक उनकी पहुंच बनी रही. इससे संक्रमण फैलने और दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है.

ओपीडी में जानवरों की आवाजाही से संक्रमण का खतरा

केंद्र सरकार की ओर से एचआईवी संक्रमित मरीजों को हर माह हजारों रुपये मूल्य की निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. अस्पताल की ओपीडी और दवा वितरण रूम में गंदगी और पशुओं की आवाजाही के कारण इन दवाओं के खराब होने की आशंका बनी रहती है. विशेष रूप से एचआईवी संक्रमित नवजातों को दी जाने वाली आवश्यक दवाएं, जैसे सेप्ट्रोन, भी जोखिम में बताई जा रही हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी दवाओं की शुद्धता और सुरक्षित भंडारण बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इनमें मामूली दूषण भी मरीजों के लिए घातक हो सकता है.

चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि एआरटी के एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी स्वयं बिल्लियों की देखभाल करते पाए गए. इससे अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. इससे पहले भी अस्पताल में स्वच्छता और कीट-नियंत्रण में लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं. हाउसकीपिंग व्यवस्था संभाल रही बीवीजी कंपनी पर पूर्व में 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है, बावजूद इसके स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा. अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठ रही हैं.

क्या बोले मेडिकल कॉलेज के डीन?

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर लापरवाही माना है. उन्होंने स्वीकार किया कि ओपीडी क्षेत्र में बिल्ली के तीन बच्चे मिले थे, जिनमें से दो को रेस्क्यू कर लिया गया है और तीसरे को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है. डीन ने कहा कि मरीजों के बीच बिल्लियों की मौजूदगी संक्रमण और बीमारियों के फैलाव को बढ़ावा दे सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पेस्ट एवं एनिमल कंट्रोल व्यवस्था संभाल रही एजेंसी के कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की दोबारा रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे.

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं अस्पताल की स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि बड़े सरकारी अस्पतालों में ही इस प्रकार की लापरवाही जारी रही तो गरीब और गंभीर रोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कठिन हो जाएगा.

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