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महाराष्ट्र

मुंबई एयरपोर्ट पर अब नमाज नहीं! सरकार ने बताई असली वजह, दिया ये नया विकल्प

मुंबई एयरपोर्ट पर टैक्सी चालकों की नमाज अदा करने की मांग सुरक्षा कारणों के चलते खारिज कर दी गई है. राज्य सरकार और MMRDA ने एयरपोर्ट के बाहर शेड में नमाज की अनुमति देने में असमर्थता जताई थी. हालांकि मुंबई हाईकोर्ट ने वैकल्पिक स्थान खोजने पर विचार करने को कहा है, लेकिन सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए चालकों को पास की मस्जिदों में जाने का सुझाव दिया गया है.

मुम्बई के एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने को लेकर समाजवादी पार्टी और एमआईएम ने मांग की थी. जबकि बीजेपी और उसके नेता शुरुआत से ही इसका विरोध करते आ रहे हैं. इसको लेकर विधानसभा में भी जमकर बहस देखने को मिली थी.

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकाई ने एमएमआरडीए से जवाब मांगा था. एमएमआरडीए ने कोर्ट में अपने जवाब में साफ तौर पर कहा कि एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने की अनुमति देना किसी भी हालत में संभव नहीं है. राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि टेक्सी और कैब ड्राइवर्स नजदीकी मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ सकते हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी.

क्या है वजह जो नहीं मिली इजाजत?

मुंबई हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से छत्रपती शिवाजी महाराज आंतरराष्ट्रीय विमानतळ (सीएसएमआईए) के बाहर शेड बनाकर रमज़ान और अन्य दिनों में ऑटो, टैक्सी, ओला-उबर चालकों को नमाज अदा करने की अनुमति देना संभव नहीं है.

कोर्ट का राज्य सरकार और एमएमआरडीए को निर्देश

जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पुनिवाला की बेंच ने राज्य सरकार और एमएमआरडीए को निर्देश दिया कि वे सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट परिसर के भीतर ही कोई वैकल्पिक स्थान चिन्हित करने की संभावना पर विचार करें, ताकि रमजान के दौरान चालक और यात्री नमाज़ अदा कर सकें.

इससे पहले की सुनवाई में बेंच ने मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाते हुए याचिकाकर्ता ऑटो-टैक्सी, ओला-उबर मेन्स यूनियन की मांग पर विचार करने की सलाह एमएमआरडीए को दी थी.

राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि संबंधित क्षेत्र हाई-सिक्योरिटी जोन है. वहां संभावित खतरे की आशंका बनी रहती है. एयरपोर्ट और आसपास के इलाके की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस पर है.

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, प्रतिदिन पांच वक्त की नमाज़ अदा की जाती है, जिसमें 1500 से 2000 लोग शामिल होते हैं. इतनी बड़ी संख्या में लोगों के दिन में पांच बार एकत्र होने से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए अत्यंत कठिन हो जाएगा.

दूसरे विकल्प यूज करने की सलाह

अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम नानकानी ने दलील दी कि प्रस्तावित स्थान के पास ही तीन मस्जिद मौजूद हैं. इनमें से एक मस्जिद लगभग एक किलोमीटर दूरी पर है, वहां पैदल 13 मिनट में पहुंचा जा सकता है. दूसरी मस्जिद 1.3 किलोमीटर दूर है, जहां 18 मिनट में पहुंचा जा सकता है, जबकि तीसरी मस्जिद 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

खंडपीठ ने कहा कि सुरक्षा से समझौता किए बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था संभव है या नहीं, यह देखा जाए. अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि केवल रमजान महीने के दौरान अस्थायी अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है. बाद में स्थान को पूर्व स्थिति में बहाल किया जा सकता है. हालांकि, सरकारी वकील ने कहा कि चालकों के पास अपनी-अपनी कैब हैं और वे नजदीकी मस्जिदों में जाकर नमाज़ अदा कर सकते हैं.

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