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मध्यप्रदेश

Barwani News: धुरेड़ी पर बड़वानी में ‘अग्नि परीक्षा’, ज्वाला माता को खुश करने के लिए अंगारों पर नंगे पांव चले श्रद्धालु

बड़वानी : होली के पावन पर्व पर बड़वानी जिले के अंजड़ नगर में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला. यहां गुजराती कोली समाज द्वारा धुरेड़ी के अवसर पर पारंपरिक अग्नि पदयात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर ज्वाला माता के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की.

धुरेड़ी पर पूजन के बाद हुई अग्नी परीक्षा

यह अनूठी परंपरा हर वर्ष ज्वाला माता मंदिर प्रांगण में निभाई जाती है. बुधवार शाम ढोल-धमाल, शंखनाद और माता के गगनभेदी जयकारों के साथ आयोजन की शुरुआत हुई. श्रद्धालुओं का जत्था भक्ति गीतों के साथ मंदिर परिसर में पहुंचा, जहां पहले विधिवत पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद शुरू हुई अग्नी परीक्षा.

ज्वाला माता को प्रसन्न करने धधकते अंगारों पर चले

मंदिर परिसर में करीब 8 से 10 फीट लंबी धधकती अंगारों की चूल तैयार की गई. जैसे ही पुजारियों ने माता की आरती उतारी, एक-एक कर श्रद्धालु नंगे पैर अंगारों पर चलने लगे. कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर इस अग्नि परीक्षा में शामिल हुए, तो कई माता को प्रसन्न करने के लिए. खास बात यह रही कि अंगारों की तेज तपिश के बावजूद भक्तों के चेहरे पर दर्द नहीं बल्कि आस्था और विश्वास की चमक साफ दिखाई दे रही थी.

यहां पूरी होती है मन्नत

मंदिर समिति सदस्य धीरेंद्र डावर ने बताया, ” कोली समाज द्वारा यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है. मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से अंगारों पर चलने से माता ज्वाला देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.” आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल व मेडिकल टीमें भी तैनात रहीं.

धुरेड़ी पर हुई गाड़ा खिंचाई

धुरेड़ पर ही बड़वानी में सदियों पुरानी गाड़ा खिंचाई की परंपरा निभाई गई, जिसने जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया. संत खांडेराव महाराज की स्मृति में आयोजित इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए प्रदेशभर से हजारों श्रद्धालु पहुंचे.यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आस्था का जीवंत उत्सव बन गया. पूरे कार्यक्रम में विवाह समारोह जैसी विधिवत रस्में निभाई गईं. महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में हल्दी के छापे लगाकर गाड़ों का पूजन करती नजर आईं.

बड़वानी में 15 गाड़े एक साथ चले

नवलपुरा क्षेत्र में धुरेड़ी की शाम ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला. यहां 15 गाड़ों को एक-दूसरे से मजबूती से बांधकर सजाया गया था. पूजन के बाद गाड़ा खींचने वाले बड़वे राकेश यादव को हल्दी लगाई गई. जैसे ही जयघोष के बीच बड़वे ने गाड़ों को स्पर्श किया, कई टन वजनी गाड़े स्वतः चल पड़े. इन गाड़ों को भारी भीड़ और श्रद्धालुओं के साथ लगभग 500 मीटर तक खींचा गया. वहीं, ठीकरी में भी गाड़ा खिंचाई परंपरा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई गई.

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