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उत्तरप्रदेश

Baghpat News: हिस्ट्रीशीटर विवेक मलिक मर्डर केस में बड़ा खुलासा, 27 साल पुरानी रंजिश में हुई हत्या; जानें 11 लाशों का पूरा इतिहास

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के दोघट कस्बे में मंगलवार रात एक शादी समारोह गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा. बहावड़ी गांव के हिस्ट्रीशीटर विवेक मलिक उर्फ विक्की (42) की चार गोलियां मारकर हत्या कर दी गई. यह महज एक हत्या नहीं, बल्कि 27 साल से चले आ रहे एक खूनी रंजिश का नया अध्याय है, जिसमें अब तक दोनों पक्षों के 11 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

घटना दोघट के धूम सिंह फार्म हाउस की है. बहावड़ी गांव की पूर्व प्रधान बबली देवी के पति विक्की अपने साथियों के साथ बारात में आए थे. रात करीब 1 बजे जब चढ़त हो रही थी, तभी पार्किंग क्षेत्र में आरोपियों ने विक्की को घेर लिया. हमलावरों ने करीब 15-20 राउंड फायरिंग की. विक्की को चार गोलियां लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई. भाग रहे मुख्य आरोपी यशवीर उर्फ रजत को भीड़ ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

27 साल की दुश्मनी, 3 भाइयों की हत्या का बदला

  • 999: दरियाव के बेटे जितेंद्र की हत्या हुई, जिसमें मृतक विक्की मुख्य आरोपी था.
  • 2000-2001: वेदू पक्ष के सुरेश और यशपाल की हत्या हुई.
  • 2011: दरियाव के बेटे प्रधान बिजेंद्र का गला रेतकर मर्डर हुआ (विक्की इसमें भी नामजद था).
  • 2014-2016: बिजेंद्र के भाई देवेंद्र और धर्मेंद्र की हत्याएं हुईं.
  • 2015: कुख्यात बदमाश विक्की त्यागी की हत्या मुजफ्फरनगर कचहरी में विवेक (विक्की) के बेटे सागर ने सिर्फ इसलिए कर दी थी क्योंकि वह विरोधी पक्ष की मदद कर रहा था.1

अब तक हो चुकी हैं कुल 11 हत्याएं

27 साल पहले शुरू हुई रंजिश में अभी तक दोनों तरफ से 11 हत्याएं हो चुकी हैं. अब अपने पिता जितेंद्र और अन्य परिवार वालों की हत्या का बदला लेने के लिए यशवीर उर्फ रजत ने गांव में 39 किलोमीटर दूर दोघट आकर विवेक उर्फ विक्की की हत्या की. वहां पर पकड़े गए यशवीर उर्फ रजत ने खुद चिल्लाकर कहा कि उसने पिता, चाचा और ताऊ की हत्या करने वाले से बजसा से लिया. बहावड़ी गांव में एक ही कुटुंब के वेदू ऐक दरियाव सिंह के परिवारों नें वर्चस्व को लेकर विवाद शुरू हो गया, जो बाद में प्रधान पद की चुनावी रंजिश नें बदल गया. सबसे पहले साल 1999 में दरियाव के बेटे जितेंद्र को गोली हत्या कर दी गई. उसमें मृतक विवेक मुख्य आरोपी थी. अगले साल 2000 में वेदू के बेटे सुरेश मलिक और 2001 में वेदू के परिवार के यशपाल की हत्या कर दी गई.

10 साल तक शांत रहे दोनों पक्ष

इस तरह लगातार हत्याएं होने पर गांव के लोगों ने पहल करते हुए दोनों पक्षों में समझौता करवा दिया. दस साल तक दोनों पक्ष शांत रहे. फिर 2011 में हत्या का सिलसिला दोबारा शुरू हुआ. दरियाब के बेटे प्रधान बिजेंद्र की शादी समारोह से लौटते समय गला रेतकर हत्या कर दी गई.

इसमें भी विवेक पर FIR दर्ज हुई. इसके बाद 2014 में बिजेंद्र के भाई देवेंद्र और 2016 में धर्मेंद्र का मर्डर हुआ. इस बीत 2015 में कुख्यात विक्की त्यागी की हत्या केवल इसी बात पर करने की बात सामने आई कि वो दरियाव पक्ष की मदद करता था. इन हत्याओं के बाद दोनों पक्षों के लोग अपनी कानूनी कार्रवाई में लग गए. और खूनी खेल पर विराम लग गया. 2014 में विवेक जेल से बाहर आया. तो अब उसकी हत्या कर दी हई. इस तरह 27 साल पहले शुरू हुई रंजिश में ऊले ही खूनी खेल कुछ साल के लिए थम गया. मगर दोनों परिवार आज भी एक दूसरे के जानी दुश्मन बने हुए हैं.

जेल से बाहर आते ही फिर शुरू हुआ खूनी खेल

विक्की साल 2011 में जेल गया था और 2024 में ही बाहर आया था. बाहर आने के बाद वह फिर से अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहा था, जिसके बैनर पूरे गांव में लगे थे. यशवीर उर्फ रजत, जिसने अपने पिता जितेंद्र और ताऊ को खोया था, इसी ताक में था. 39 किलोमीटर दूर आकर उसने इस रंजिश को अंजाम दिया. एसपी सूरज कुमार राय के अनुसार, पुलिस ने रजत की मां सुनीता और ताऊ लोकेंद्र समेत चार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. घटनास्थल से एक तमंचा भी बरामद हुआ है.

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