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छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Assembly: स्काउट गाइड टेंडर घोटाले के आरोपों पर सदन में रार, विपक्ष ने सरकार को घेरा; जानें क्यों लगे ‘बोरे बासी’ के नारे

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में बालोद स्काउट गाइड टेंडर को लेकर सवाल उठा. विपक्ष के विधायक राघवेंद्र सिंह ने सवाल उठाया कि स्काउट गाइड के पदेन अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को 13 नवंबर को मनोनीत किया गया है.जबकि टेंडर 10 तारीख को हो गया.इस टेंडर के लिए बैठक आयोजित हुई थी या नहीं.इस टेंडर को किसने अप्रूवल किया. इस पहले टेंडर में 92 बिंदु निर्धारित थे. जिसे निरस्त कर दिया.इसके बाद फिर से 22 तारीख को टेंडर हुआ,जिसमें निर्धारित बिंदुओं को घटाकर 52 कर दिया गया. फिर जिस स्थान पर कार्य होना था वो कार्य 4 तारीख को प्रारंभ हुआ और 3 दिवस के अंदर कार्य पूरा कर लिया गया.

स्कूल शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि टेंडर की प्रक्रिया में जिला कलेक्टर शामिल थे.भारत स्काउट गाइड और राज्य स्काउट गाइड टेंडर के लिए जिम्मेदार होते हैं.स्कूल शिक्षा मंत्री जब पद पर बैठता है तो वो ऑटोमेटिक ही राज्य स्काउट गाइड का पदेन अध्यक्ष मनोनीत हो जाता है. ऐसा पहली बार हुआ है कि राज्य शासन ने किसी भी तरह का कोई विवाद ना हो इसके लिए एक चिट्ठी जारी की.वो चिट्ठी 13 तारीख को जारी की गई थी.इससे पहले जितने भी स्काउट गाइड के मनोनीत अध्यक्ष हुए हैं उनके लिए किसी भी तरह की कोई चिट्ठी जारी नहीं की गई थी. रही बात टेंडर की तो बहुत से टेंडर भारत स्काउट गाइड की ओर से भी जारी किए जाते हैं.जिस पर काम शुरु हो जाता है.

बोरेबासी को लेकर हुआ हंगामा
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जब विधायक के सवाल का जवाब दिया तब बोरे बासी को लेकर हंगामा हुआ.राघवेंद्र सिंह ने मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर कहा कि बिना टेंडर फाइनल हुए काम कैसे शुरु हुआ कृप्या इसकी पूरी जानकारी दीजिए.इस सवाल के जवाब पर सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि काम वैसे ही शुरु हुआ जैसे बोरे बासी का आयोजन हुआ था. बोरे बासी का नाम लेने पर विपक्ष के विधायक ने सत्ता पक्ष पर मुद्दा भटकाने का आरोप लगाया और हंगामा किया. इस दौरान सभापति ने दोनों पक्षों को शांत कराया और अंतिम प्रश्न पूछने के लिए राघवेंद्र सिंह को कहा.राघवेंद्र सिंह ने अपने अंतिम प्रश्न में टेंडर के पहले काम शुरु करने की जो प्रक्रिया हुई है, उसकी जांच करवाने के लिए समिति बनाने की मांग की.इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले भी इसी तरह की जांच को लेकर प्रश्न आया था,और उस वक्त भी मैंने यही कहा कि जो आयोजन हुआ वो राज्य का नहीं था.उसमें केंद्र की ओर से भी टेंडर जारी हुए थे.जो काम शुरु हुए वो केंद्र के टेंडर के थे ना कि राज्य के.

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