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हरियाणा में पंचायती जमीन पर रास्तों का खेल खत्म! सरकार लाने जा रही है बेहद सख्त नियम; अवैध कब्जा किया तो खैर नहीं, जानें क्या हैं New Rules

चंडीगढ़:  हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती भूमि (शामलात देह) के प्रबंधन को लेकर एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। अब गांवों में पंचायती जमीन पर रास्ता बनाने या उसका निजी उपयोग करने के नियम पहले से कहीं अधिक कड़े कर दिए गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पंचायतों की संपत्ति की रक्षा करना और अवैध कब्जों पर लगाम लगाना है।

नए नियमों के अनुसार, यदि कोई बिल्डर, निजी कंपनी या व्यक्ति अपने प्रोजेक्ट के लिए पंचायती भूमि से रास्ता (Access Road) मांगता है, तो उसे एक लंबी और पारदर्शी प्रक्रिया से गुजरना होगा। अब केवल सरपंच या चुनिंदा पंचों की सहमति काफी नहीं होगी। पूरे गांव की ग्राम सभा में प्रस्ताव पास होना अनिवार्य है। पंचायत के कम से कम तीन-चौथाई सदस्यों का समर्थन होने पर ही रास्ता देने की फाइल आगे बढ़ेगी। जमीन के बदले पंचायत को बाजार दर (Market Rate) या निर्धारित कलेक्टर रेट के अनुसार भारी शुल्क चुकाना होगा।

अवैध कब्जों पर ‘पीला पंजा’ चलाने की तैयारी
सरकार ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक रास्तों, फिरनी (गांव की बाहरी सड़क) और तालाबों की जमीन पर किए गए किसी भी निर्माण को नियमित (Regularize) नहीं किया जाएगा। डिजिटल मैपिंग और ड्रोन सर्वे के जरिए उन रास्तों की पहचान की जा रही है जिन पर रसूखदार लोगों या स्थानीय निवासियों ने दीवारें खड़ी कर कब्जा कर लिया है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे रास्तों को तुरंत खाली कराया जाए।

हरियाणा सरकार की ‘मुख्यमंत्री शहरी/ग्रामीण आवास योजना’ के तहत 20 साल से पुराने मकानों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन यहाँ भी नियमों को कड़ा रखा गया है। यदि कोई मकान सार्वजनिक रास्ते को रोक रहा है, तो उसे मालिकाना हक नहीं दिया जाएगा।
जल निकासी (Drainage) और फिरनी की जमीन पर बने निर्माणों को किसी भी सूरत में छूट नहीं मिलेगी।

क्यों पड़ी इन कड़े नियमों की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि गांवों के आसपास विकसित हो रहे निजी फार्महाउसों और कॉलोनियों के लिए पंचायती जमीन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा था। इससे न केवल पंचायतों को आर्थिक नुकसान हो रहा था, बल्कि गांवों का आपसी भाईचारा और बुनियादी ढांचा भी प्रभावित हो रहा था।

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