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Petrol Pump Secrets: जमीन के नीचे कितना लीटर पेट्रोल-डीजल? स्टॉक और टैंक की पूरी जानकारी यहाँ देखें

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की स्थिति बन रही है. इस उथल-पुथल का असर देश में भी महसूस किया जा रहा है, विशेषकर गैस की आपूर्ति के मोर्चे पर. स्थिति का आकलन करते हुए सरकार ने गैस सप्लाई और तेल से जुड़े नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. हालांकि, सरकारी आश्वासनों के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए पेट्रोल और डीजल की कमी की अफवाहें तेजी से फैल गई हैं.

जिसका नतीजा यह हुआ कि कई राज्यों में लोग अपनी गाड़ियों के टैंक फुल कराने के लिए पेट्रोल पंपों की तरफ दौड़ पड़े. आम दिनों की तुलना में अचानक मांग इस कदर बढ़ी कि कई जगह अफरातफरी का माहौल बन गया. लोग घबराहट में जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने लगे. इस ‘पैनिक बाइंग’ की वजह से पेट्रोल पंपों का दैनिक स्टॉक समय से पहले ही खत्म होने लगा, जिससे लंबी कतारें लग गईं. असलियत में ईंधन की कोई किल्लत नहीं है, यह पूरी तरह से अफवाह है.

पेट्रोल पंप पर कितना होता है पेट्रोल-डीजल का स्टॉक?

ऐसी स्थिति में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर एक पेट्रोल पंप के पास स्टॉक रखने की कितनी गुंजाइश होती है. पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) के मानकों के अनुसार, भारत में पेट्रोल पंपों के अंडरग्राउंड (भूमिगत) टैंकों की क्षमता अमूमन 15,000 लीटर से लेकर 45,000 लीटर के बीच होती है. यह क्षमता पंप की जगह और वहां होने वाली दैनिक बिक्री के आधार पर तय होती है. महानगरों और व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित पंपों में भारी मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा क्षमता वाले टैंक लगाए जाते हैं. वहीं, छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों में अपेक्षाकृत छोटे टैंक स्थापित किए जाते हैं.

संकट से निपटने के लिए क्या हैं नियम

बाजार में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए नियम बेहद सख्त हैं. PESO के दिशा-निर्देशों के तहत, किसी भी पेट्रोल पंप के लिए यह अनिवार्य है कि वह अपनी औसत बिक्री के बराबर कम से कम तीन दिन का रिजर्व स्टॉक हमेशा बनाए रखे. यह नियम इसलिए लागू है ताकि सप्लाई चेन में कोई अस्थायी बाधा आने पर भी आम ग्राहकों को तुरंत किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.

ईंधन को रिफाइनरी या डिपो से पेट्रोल पंप तक पहुंचाने के लिए मुख्य रूप से 12,000 से 20,000 लीटर क्षमता वाले टैंकरों का उपयोग किया जाता है. इनकी आवाजाही सुरक्षा के कड़े पैमानों से गुजरती है. नियमों के अनुसार, 25,000 लीटर से अधिक ईंधन जमा करने या उसकी हैंडलिंग के लिए सीधा सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य है, जबकि इससे कम मात्रा के लिए संबंधित कंपनियों से अनुमति लेनी होती है. भारत में ईंधन भंडारण और परिवहन का यह पूरा तंत्र ‘पेट्रोलियम नियम 2002’ के अधीन काम करता है. इंडियन ऑयल (IOCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियां भी सप्लाई सिस्टम को सुचारू रखने के लिए अपने कड़े दिशा-निर्देश लागू रखती हैं.

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