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हरियाणा

Nuh Ijtema 2026: नूंह में तीन दिवसीय इस्लामिक जलसा संपन्न, लाखों की भीड़ ने देश में अमन-चैन के लिए उठाए हाथ

नूंह: जिले के अड़बर गांव में आयोजित तीन दिवसीय इस्लामिक जलसा सोमवार को अमन, शांति और तरक्की की दुआओं के साथ संपन्न हो गया. इस विशाल आयोजन में हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों से करीब 10 लाख लोगों के शामिल हुए. जलसे के समापन के बाद जब श्रद्धालु अपने घरों की ओर लौटे, तो कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही.

हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनी जलसा: इस जलसे की सबसे बड़ी खासियत हिंदू-मुस्लिम एकता का अद्भुत प्रदर्शन रहा. हिंदू समाज के लोगों ने जलसे में वेज बिरयानी की व्यवस्था की. साथ ही स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए. कई लोगों ने सेवा भाव से काम करते हुए आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की. इस आयोजन ने सामाजिक सौहार्द का मजबूत संदेश दिया.

बुराइयों से दूर रहने पर दिया गया जोर: तीन दिनों तक चले इस जलसे में समाज सुधार के मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया. मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल पर रोक लगाने और बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की अपील की गई. वक्ताओं ने कहा कि समाज में फैल रही बुराइयों को त्याग कर अच्छाई के रास्ते पर चलना समय की जरूरत है.

मौलाना साद का खास संदेश: जलसे के दौरान मौलाना हजरत साद साहब ने लोगों को बुराइयों से दूर रहकर नेक रास्ते पर चलने की हिदायत दी. उन्होंने कहा कि, “बुराइयां तेजी से बढ़ रही हैं, इसलिए जरूरी है कि हम जमातों में निकलकर तबलीग का काम करें और लोगों को नमाज की दावत दें.” साथ ही उन्होंने तबलीगी जमात को मजबूत करने और इस्लाम के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया.

सैकड़ों जमातें तबलीग के लिए रवाना: जलसे के समापन के बाद सैकड़ों जमातें तबलीग के काम को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में रवाना हो गईं. यह जलसा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना बल्कि समाज में सुधार और जागरूकता फैलाने का माध्यम भी साबित हुआ.

व्यवस्थाओं के बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था रही प्रभावित: वहीं, इस बार जलसे में खाने-पीने, शौचालय, बिजली और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं बेहतर देखने को मिलीं. ट्रैफिक को सुचारु रखने के लिए पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात रहे, लेकिन भारी भीड़ के कारण कई घंटों तक यातायात व्यवस्था चरमरा गई.

लाखों लोग हुए शामिल: समापन के दौरान जलसा कमेटी के सदस्य आबिद दानीबास ने कहा कि, “इस जलसे में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी है. यह आयोजन अमन और भाईचारे का संदेश देने में पूरी तरह सफल रहा.” वहीं, इनेलो जिला अध्यक्ष चौधरी ताहिर हुसैन ने कहा कि, “भीड़ बहुत ज्यादा थी, लेकिन सबसे खास बात यह रही कि जलसे में हिंदू-मुस्लिम एकता की शानदार तस्वीर देखने को मिली.” इसके अलावा कारी जी ने कहा कि, “जलसे का मुख्य उद्देश्य लोगों को दीन की सही राह दिखाना और समाज में अच्छाई को बढ़ावा देना है, जो पूरी तरह सफल रहा.”

बता दें कि इससे पहले भी मेवात के तिरवाड़ा और फिरोजपुर झिरका में इस तरह के तबलीगी जलसे सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं. अड़बर का यह जलसा भी उसी कड़ी में एक और सफल और प्रेरणादायक आयोजन साबित हुआ.

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